Who Were the 15 Students Killed in Lucknow Coaching Fire: लखनऊ कोचिंग अग्निकांड में 15 छात्रों की मौत हो गई। जानिए कौन थे ये छात्र और क्या है घायलों की ताजा स्थिति।

Lucknow Coaching Fire Victims Name: लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण कोचिंग सेंटर अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। सोमवार को लगी आग में 15 छात्रों की जान चली गई, जबकि 9 अन्य छात्र गंभीर रूप से घायल होकर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वे छात्र कौन थे, जो अपने भविष्य को संवारने के लिए कोचिंग पहुंचे थे, लेकिन वापस घर नहीं लौट सके। जानिए जान गंवाने वाले सभी 15 छात्रों के नाम?

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प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे, लेकिन बीच में ही टूट गया सफर

मृतकों की सूची में शामिल छात्र-छात्राएं अलग-अलग परिवारों से थे, लेकिन उनका सपना एक जैसा था, पढ़-लिखकर बेहतर भविष्य बनाना। हादसे में जान गंवाने वालों में सागर, अनामिका, निलेश, संयम, अनुष्ठा, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, अब्दुल रहमान, सूरज शाह, शाहजान, जयनिल चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमाल्या शामिल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग लगने के बाद ऊपरी मंजिलों पर मौजूद कई छात्र धुएं के बीच फंस गए। आग से ज्यादा घातक साबित हुआ जहरीला धुआं, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। अधिकांश छात्रों की मौत दम घुटने की वजह से हुई।

जो बच गए, उनकी हालत भी बेहद गंभीर

हादसे में घायल जयंत, लवप्रीत, मोहम्मद आसिफ, भुवन श्रीवास्तव, पंकज, शैलेंद्र, अभिषेक, पंकज जोशी और गौरव कुमार का इलाज केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार सभी की स्थिति गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि तीसरी मंजिल से जान बचाने के लिए कूदने वाले दो छात्रों को रीढ़ और पीठ में गंभीर चोटें आई हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं और सीटी स्कैन समेत अन्य जांचों के आधार पर इलाज किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर लिया जायजा

हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। उन्होंने घायल छात्रों का हाल जाना और अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी घायलों को मुफ्त और सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

हादसे से आगे की कहानी: सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

यह घटना सिर्फ एक अग्निकांड नहीं है, बल्कि कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों को लेकर बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। जिन 15 छात्रों ने अपनी जान गंवाई, वे किसी आंकड़े का हिस्सा नहीं थे, बल्कि अपने परिवारों की उम्मीद, सपने और भविष्य थे। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि हादसे की वजहों का पता लगाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी अन्य छात्र को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।