MP Cyber Registration Office: भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साइबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ किया। अब संपदा 2.0 के जरिए 75 से अधिक सेवाएं पेपरलेस और कैशलेस होंगी। वीडियो केवाईसी से घर बैठे होगा रजिस्ट्रेशन, जानिए पूरी प्रक्रिया।

Sampada 2.0 e-governance Award: सरकारी दफ्तरों की लंबी कतारें, फाइलों का बोझ और दस्तावेजों की भागदौड़—अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। मध्यप्रदेश ने पंजीयन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को भोपाल स्थित पंजीयन भवन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साइबर पंजीयन कार्यालय का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार पारदर्शिता, तत्परता और नवाचार को प्रशासन की प्राथमिकता बना रही है, और यह पहल उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

संपदा 1 से संपदा 2.0 तक, अब साइबर पंजीयन

मध्यप्रदेश पहले ही ‘संपदा 1’ और ‘संपदा 2.0’ जैसे डिजिटल मॉडलों के जरिए पंजीयन व्यवस्था में सुधार कर चुका है। अब साइबर पंजीयन की शुरुआत तकनीक आधारित सुशासन के नए अध्याय के रूप में देखी जा रही है। राज्य सरकार के अनुसार, मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां 75 से अधिक सेवाओं—जैसे लोन, मुख्तयारनामा, माइनिंग लीज, हलफनामा, पावर ऑफ अटॉर्नी और पार्टनरशिप डीड—के लिए साइबर पंजीयन की सुविधा शुरू की गई है। यह प्रक्रिया पेपरलेस और कैशलेस प्रणाली को बढ़ावा देती है।

यह भी पढ़ें: Vikramotsav 2026: उज्जैन में सांस्कृतिक महापर्व का शुभारंभ, CM मोहन यादव ने की अंतरराष्ट्रीय सम्मान की घोषणा

वीडियो केवाईसी और घर बैठे पंजीयन

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब शासन और उसके उपक्रमों के अंतरण दस्तावेज भी पूरी तरह पेपरलेस रजिस्ट्रेशन के जरिए पूरे होंगे। जल्द ही हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण से जुड़े अंतरण कार्यों के लिए नागरिकों को पंजीयन कार्यालय नहीं आना पड़ेगा। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वीडियो केवाईसी सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी।

14 लाख से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का डिजिटल पंजीयन हो चुका है। ‘संपदा 2.0’ के नवाचार को वर्ष 2025 का राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार भी मिल चुका है, जो इस प्रणाली की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को दर्शाता है। प्रदेश के 55 जिलों में साइबर तहसील परियोजना लागू की गई है, जिसके माध्यम से राजस्व बंटवारा और नामांतरण जैसी प्रक्रियाएं भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से की जा रही हैं।

पायलट से राज्यव्यापी विस्तार तक

उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 में दस्तावेज पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग के लिए एडवांस सॉफ्टवेयर ‘संपदा 2.0’ लागू किया गया।

गुना, हरदा, रतलाम और डिंडौरी जिलों में इसका पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, जिसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया गया। अब कई ऐसे दस्तावेज हैं जिनके लिए उप-पंजीयक कार्यालय जाने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती।

प्रशिक्षण और पारदर्शिता पर जोर

पंजीयन से जुड़े कार्यों को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने के लिए प्रदेशभर के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव श्री अमित राठौर और श्री राघवेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी जिलों के अधिकारी, बैंककर्मी और लाभार्थी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।

क्या बदलेगा आम नागरिक के लिए

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर पंजीयन व्यवस्था से न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी। डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और दस्तावेजों की ट्रैकिंग आसान होगी। मध्यप्रदेश की यह पहल प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में एक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। यदि क्रियान्वयन इसी गति से जारी रहा, तो राज्य डिजिटल गवर्नेंस के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

यह भी पढ़ें: 42 वर्षीय जूनियर से इश्क लड़ा बैठी 52 साल की महिला अफसर, फिल्म जुदाई की तरह है यह कहानी