साउथ सिनेमा की जानी-मानी हस्ती और नामी म्यूजिक कंपोजर... सिंगर देवा का निधन हो गया है। जिनके जाने से बॉलीवुड में भी दुख की लहर है। उन्होंने अपने संगीत से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। तो आइए जानते हैं उनका संघर्ष से सफलता तक का सफर
साउथ सिनेमा में कई ऐसे संगीतकार हुए, जिन्होंने अपने संगीत से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। इनमें एक बड़ा नाम संगीतकार देवा का भी है। उन्हें ‘थेनीसाई थेंद्रल’ यानी मधुर संगीत की बयार के नाम से जाना जाता था। देवा ने अपने करियर में कई सुपरहिट गाने दिए। लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। कई सालों तक संघर्ष करने के बाद उन्हें वह पहचान मिली, जिसने उनकी किस्मत बदल दी।
आसान नहीं था देवा का शुरुआती सफर
देवा का पूरा नाम देवनासन चोक्कालिंगम था। संगीत में उनकी दिलचस्पी बचपन से थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनके पिता डाक विभाग में काम करते थे और परिवार की जिम्मेदारियां भी काफी थीं। ऐसे में संगीत की दुनिया में जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं था।
देवा ने थिएटर से जुड़े लोगों के साथ काम किया। धीरे-धीरे उन्होंने हारमोनियम और दूसरे संगीत वाद्ययंत्रों को सीखना शुरू किया। उन्होंने संगीत की बारीकियां समझीं और कई सालों तक मौके की तलाश में मेहनत करते रहे। फिल्मों में काम मिलने से पहले उन्होंने भक्ति गीतों पर भी काम किया और संगीतकारों के साथ जुड़कर अनुभव हासिल किया।
इस फिल्म ने बदल दी किस्मत
देवा के करियर की शुरुआत फिल्म ‘मनसुक्केथा महारासा’ से हुई, लेकिन साल 1990 में आई फिल्म ‘वैगासी पोरंथाचु’ उनके लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म के गानों को दर्शकों ने खूब पसंद किया। खासकर ‘चिन्ना पोन्नु थान’ गाने ने उन्हें लोगों के बीच पहचान दिलाई। इसके बाद देवा के पास फिल्मों में संगीत देने के मौके बढ़ने लगे।
‘बाशा’ के संगीत से मिली बड़ी पहचान
देवा के करियर में रजनीकांत की फिल्म ‘बाशा’ का संगीत भी बेहद खास रहा। इसके बाद ‘अन्नामलाई’, ‘आसाई’ और ‘मुथु’ जैसी फिल्मों में उनके संगीत को खूब पसंद किया गया। रजनीकांत की फिल्मों में सुपरस्टार की एंट्री के दौरान बजने वाला खास संगीत भी देवा की पहचान बन गया।
400 से ज्यादा फिल्मों में दिया संगीत
देवा ने तमिल के अलावा तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी संगीत दिया। उन्होंने अपने गानों में स्थानीय धुनों और काना संगीत को खास अंदाज में पेश किया। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी। उनका सफर बताता है कि लगातार मेहनत और अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश इंसान को सफलता तक पहुंचा सकती है।








