नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का असर बिहार तक कैसे पहुंच सकता है? जानिए हिमालय से निकलने वाली कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियों का पूरा कनेक्शन, नेपाल में भारी बारिश क्यों बनती है बिहार के लिए खतरा और बाढ़ का पूरा विज्ञान।
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता सामने रख दी है। इस त्रासदी में 300 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि और 1,500 से अधिक लोगों के लापता होने की बात सामने आई है, जबकि हजारों बचावकर्मी राहत अभियान में जुटे हैं। लेकिन सवाल सिर्फ नेपाल की तबाही का नहीं है, नेपाल में होने वाली भारी बारिश और अचानक बाढ़ का असर बिहार तक क्यों पहुंचता है?
नेपाल में बाढ़ इतनी तेजी से क्यों आती है?
नेपाल का पहाड़ी भूगोल इसकी सबसे बड़ी वजह है। यहां 6,000 से अधिक छोटी-बड़ी नदियां हिमालय से निकलती हैं। जून से सितंबर के मानसून के दौरान सालाना बारिश का बड़ा हिस्सा कुछ महीनों में ही हो जाता है। तेज ढलानों के कारण पानी तेजी से नीचे उतरता है और फ्लैश फ्लड की स्थिति बन जाती है। ग्लेशियर पिघलने और ग्लेशियल झीलों के बढ़ने से GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा भी बढ़ रहा है।
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नेपाल की बाढ़ का बिहार तक कैसे पहुंचता है असर?
बिहार की कई प्रमुख नदियों का कैचमेंट नेपाल और तिब्बत में है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला-बलान और अधवारा समूह जैसी नदियां नेपाल से आने वाले पानी पर निर्भर हैं। कुल कैचमेंट का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा नेपाल और तिब्बत में होने के कारण पहाड़ों में हुई तेज बारिश का असर कुछ घंटों या दिनों बाद बिहार के मैदानी इलाकों में दिखाई दे सकता है।
इस बार की आपदा भोटे कोशी-त्रिशूली नदी तंत्र से जुड़ी बताई जा रही है। वैज्ञानिकों को आशंका है कि भूस्खलन से कहीं अस्थायी प्राकृतिक बांध तो नहीं बना, जिसके टूटने पर दूसरी बाढ़ की लहर पैदा हो सकती है। त्रिशूली आगे नारायणी नदी तंत्र से जुड़ती है, जो भारत में गंडक के रूप में प्रवेश करती है।
पहाड़ों से आने वाला पानी मैदान में ज्यादा खतरनाक क्यों होता है?
हिमालयी नदियां सिर्फ पानी नहीं, बल्कि भारी मात्रा में रेत, मिट्टी और गाद भी लेकर आती हैं। बिहार के समतल इलाकों में नदी की रफ्तार कम होने पर यह तलछट जमा होने लगती है। इससे नदी का तल ऊंचा होता है, पानी की क्षमता घटती है और कई बार नदी अपना रास्ता बदल देती है।
बिहार का करीब 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ प्रभावित या बाढ़ के खतरे वाला माना जाता है। राज्य के 38 में से 28 जिले संवेदनशील हैं। हजारों किलोमीटर लंबे तटबंध होने के बावजूद चुनौती बनी रहती है, क्योंकि पानी का बड़ा हिस्सा भारत की सीमा के बाहर पैदा होता है।
यही वजह है कि नेपाल और भारत के बीच फ्लड फोरकास्टिंग और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम बेहद अहम हैं। पहाड़ों में पानी बढ़ने की समय रहते जानकारी मिल जाए तो बिहार में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का समय मिल सकता है।
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