Old Goa World Heritage Sites: गोवा सिर्फ बीच और पार्टी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है। ओल्ड गोवा में मौजूद जो जगहें यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेड साइट का दर्जा मिला हुआ है, जहां हर साल हजारों टूरिस्ट पहुंचते हैं। जानिए इसका इतिहास... 

Goa Offbeat Places History: अगर आप गोवा को सिर्फ बीच, पार्टी और नाइटलाइफ तक ही जानते हैं, तो शायद आपने इस राज्य का सबसे खूबसूरत और ऐतिहासिक चेहरा अभी तक नहीं देखा। गोवा में एक ऐसी जगह भी है, जहां सदियों पुरानी इमारतें आज भी अपनी कहानी सुनाती हैं। यहां चर्च की घंटियां, पुराने पत्थरों की खुशबू और इतिहास का एहसास हर कदम पर महसूस होता है। हम बात कर रहे हैं ओल्ड गोवा की, जहां मौजूद दो मशहूर जगहों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज (UNESCO World Heritage) का दर्जा मिला हुआ है।

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पुराने गोवा का वो गौरवशाली इतिहास

पुराना गोवा कभी इस पूरे इलाके का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था। 15वीं और 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों के आने के बाद यह शहर उनकी सत्ता का केंद्र बना और यहां कई शानदार चर्च और इमारतें बनाई गईं। हालांकि, 18वीं सदी में जंग और बीमारियों की वजह से यह शहर काफी हद तक बर्बाद हो गया था, लेकिन इसके बावजूद यहां की कुछ ऐतिहासिक इमारतें आज भी शान से खड़ी हैं। आज के समय में इन पुरानी यादों को सहेजने के लिए खास कोशिशें की जा रही हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस शानदार विरासत को देख सकें।

बॉसिलिका ऑफ बॉम जीसस, जहां सुरक्षित है संत की देह

पुराने गोवा की सबसे खास पहचान 'बॉसिलिका ऑफ बॉम जीसस' है, जिसका निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था। यह चर्च पूरी दुनिया में इसलिए मशहूर है, क्योंकि यहां 'सेंट फ्रांसिस जेवियर' की समाधि मौजूद है। कहा जाता है कि सदियों बाद भी यहां उनकी पवित्र देह सुरक्षित है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों लोग खिंचे चले आते हैं। अपनी इसी धार्मिक और ऐतिहासिक अहमियत की वजह से इसे 1986 में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था।

सी कैथेड्रल: भव्यता और वास्तुकला के लिए मशहूर

बॉसिलिका ऑफ बॉम जीसस के ठीक पास ही सी कैथेड्रल (Se Cathedral) स्थित है, जो सेंट कैथरीन को समर्पित है। 16वीं सदी में बना यह विशाल चर्च अपनी वास्तुकला और भव्यता के लिए जाना जाता है। यह एशिया के सबसे बड़े चर्चों में से एक माना जाता है और इसकी बनावट पुर्तगाली शैली की याद दिलाती है। इन दोनों चर्चों के साथ-साथ यहां मौजूद कई अन्य छोटी पुरानी इमारतों को भी यूनेस्को की लिस्ट में शामिल किया गया है, जो पुराने गोवा की असली पहचान हैं।

इतिहास और आधुनिकता का अनोखा संगम

आज का गोवा सिर्फ बीच तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की संस्कृति में पुर्तगाली विरासत और भारतीय परंपराओं का गहरा मेल दिखता है। एक तरफ जहां पंजिम जैसा बिजी मॉर्डन शहर है, वहीं दूसरी तरफ पुराना गोवा है जो आपको सदियों पुरानी दुनिया की सैर कराता है। यहां के लोग आज भी कोंकणी और मराठी के साथ-साथ अंग्रेजी का इस्तेमाल करते हैं और अपनी पुरानी धरोहरों पर गर्व करते हैं। अगर आप अगली बार गोवा जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इन ऐतिहासिक चर्चों और संत की इस पवित्र समाधि के दर्शन करना बिल्कुल न भूलें।