क्या 'ऑपरेशन सिंदूर' और 'सिंधु जल संधि' रुकने से बेहाल पाकिस्तान अब भारत के सामने घुटने टेक रहा है? जानिए श्रीलंका के कोलंबो में हुई सीक्रेट मीटिंग का पूरा सच... 

India Pakistan Dialogue: साल 2025 में भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की कमर क्या तोड़ी, इस्लामाबाद के हुक्मरानों के होश उड़ गए। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा 26 बेगुनाह नागरिकों की हत्या के बाद, भारत ने मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया था। इस सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान और PoK में सक्रिय आतंकी कैंपों, अड्डों और लॉन्चपैड्स को नेस्तनाबूद कर दिया गया था। इस सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच राजनैतिक और राजनयिक रिश्ते पूरी तरह ठप हो गए। लेकिन अब खबर आ रही है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की मार और भारत द्वारा पानी रोके जाने से बेहाल पाकिस्तान, बैक चैनल से भारत के करीब आने की कोशिशें कर रहा है। दावा किया जा रहा है कि भारत और पाकिस्तान के कुछ प्रतिनिधियों के बीच श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में बैक चैनल बातचीत हुई है। हालांकि, इस दावे पर अलग-अलग पक्षों की राय भी सामने आई है।

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क्या है पूरा मामला?

पाकिस्तान के अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' (The Express Tribune) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि कोलंबो में आयोजित एक सुरक्षा सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कुछ पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व राजनयिक और राजनीतिक प्रतिनिधि शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह बातचीत कथित तौर पर 'ट्रैक-1.5 डिप्लोमेसी' के दायरे में हो सकती है, जहां सरकारी और गैर-सरकारी दोनों तरह के लोग मौजूद होते हैं। दूसरी ओर भारतीय समाचार पत्र 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने भी इस मुलाकात की पुष्टि की है, लेकिन इसे 'ट्रैक-2' डायलॉग (गैर-आधिकारिक बातचीत) बताया है, जिसमें भारत का कोई भी वर्तमान अधिकारी शामिल नहीं था।

सम्मेलन में किसके शामिल होने के दावे

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में दोनों तरफ से बड़े चेहरे शामिल थे। भारतीय प्रतिनिधि मंडल में बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव, पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे, पूर्व राजनयिक रुचि घनश्याम शामिल थे। जबकि पाकिस्तान की तरफ से सज्जाद हैदर खान (मौजूदा राजनयिक, विदेश मंत्रालय), पूर्व सीनेटर शेरी रहमान, मेजर जनरल (रिटायर्ड) इसफंदियार अली खान पटौदी शामिल हुए। इस दौरान एक विशेष डिनर में अमेरिकी दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री एस पॉल कपूर भी शामिल हुए थे। श्रीलंका की मीडिया के अनुसार, इस बातचीत का मकसद संकट के समय कम्यूनिकेशन को मजबूत करना और तनाव बढ़ने से रोकना था।

BJP नेता राम माधव ने दावों को किया खारिज

कोलंबो बैठक को लेकर जब विवाद बढ़ा, तो इसमें शामिल रहे बीजेपी नेता राम माधव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने इसे 'एक नॉन-स्टोरी को स्पिन देना' बताया। राम माधव ने लिखा, 'यह पूरी तरह से गलत चित्रण है। यह कोई ट्रैक-2 डायलॉग नहीं था। यह IISS का सालाना साउथ एशिया डायलॉग था, जिसमें भारत, श्रीलंका, अमेरिका, यूके, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के विद्वानों ने हिस्सा लिया था।' इसके अलावा, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उन्हें 'Track 1' (आधिकारिक बातचीत) के अलावा किसी और मीटिंग की कोई जानकारी नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस दावे को भी भारत पहले ही खारिज कर चुका ,है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-पाक किसी न्यूट्रल जगह पर शांति वार्ता के लिए राजी हुए हैं।

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कूटनीति के ये 'Track' आखिर क्या होते हैं?

Track 1 कूटनीति: यह पूरी तरह आधिकारिक होती है। इसमें दोनों देशों की सरकारें, मौजूदा मंत्री, और अधिकृत राजनयिक शामिल होते हैं। इनके फैसले सीधे नीति बनते हैं।

Track 1.5 कूटनीति: यह एक हाइब्रिड मॉडल है। इसमें सरकार के मौजूदा अधिकारी और गैर-सरकारी एक्सपर्ट्स दोनों एक साथ किसी न्यूट्रल थिंक टैंक के मंच पर अनौपचारिक चर्चा करते हैं।

Track 2 कूटनीति: यह पूरी तरह गैर-आधिकारिक होती है। इसमें रिटायर्ड अफसर, शिक्षाविद, जर्नलिस्ट और एक्सपर्ट्स शामिल होते हैं ताकि दोनों देशों के बीच भरोसा बनाया जा सके। इसका फैसला सरकारों पर बाध्यकारी नहीं होता।

क्या वाकई कोई नई पहल हुई है?

वरिष्ठ पत्रकार और राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक नितिन ए गोखले ने भी इस मीटिंग को नया 'भारत-पाक द्विपक्षीय प्रयास' मानने से इनकार किया है। उन्होंने X पर लिखा कि मस्कट, बैंकॉक और कोलंबो में होने वाली ऐसी बैठकें सालों से चली आ रही बहुपक्षीय (Multilateral) कॉन्फ्रेंस का हिस्सा हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक आयोजित करते हैं। गोखले के अनुसार, खाड़ी देशों के सुरक्षा हालातों के चलते इस बार IISS की यह मीटिंग बहरीन की जगह कोलंबो में रखी गई थी। इसे कोई नई राजनयिक शुरुआत या भारत की तरफ से किसी रियायत के तौर पर देखना 'अतिशयोक्ति से परे' (विशाल कल्पना) है। यह सिर्फ एक सालाना 'टॉक शॉप' (चर्चा का मंच) था।

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