Pakistan IMF Chairmanship 2027: कर्ज के दबाव से जूझ रहा पाकिस्तान 2027 में IMF और विश्व बैंक समूह के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता करेगा। देश को IMF से 1.2 अरब डॉलर की अतिरिक्त मदद मिलने की संभावना भी है।
आर्थिक संकट और विदेशी कर्ज के दबाव से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी खबर सामने आई है। पाकिस्तान 2027 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक समूह (World Bank Group) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता करेगा। पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। देश करीब 74 साल बाद इस जिम्मेदारी पर लौटेगा। हालांकि, यह पद मिलने का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान का आर्थिक संकट खत्म हो गया है।
1953 के बाद पाकिस्तान को फिर मिलेगी यह जिम्मेदारी
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकॉक में 2026 की IMF और विश्व बैंक समूह की सालाना बैठक के पूर्ण सत्र के दौरान पाकिस्तान को अगला चेयरमैन चुने जाने की घोषणा हुई। पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री अहद खान चीमा, जो विश्व बैंक में देश के गवर्नर भी हैं, इस जिम्मेदारी को संभालेंगे।
पाकिस्तानी मंत्रालय ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उसके मुताबिक, इस भूमिका से देश को वैश्विक आर्थिक और विकास संबंधी चर्चाओं में योगदान देने तथा सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
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कर्ज के लिए IMF पर निर्भर है पाकिस्तान
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए IMF के दो प्रमुख वित्तीय कार्यक्रमों पर निर्भर है। इनमें 7 अरब डॉलर का एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) और 1.4 अरब डॉलर का रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) शामिल हैं। EFF का उद्देश्य भुगतान संतुलन की जरूरतों को पूरा करने और आर्थिक सुधारों में मदद करना है। वहीं, RSF के जरिए जलवायु संबंधी जोखिमों से निपटने और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
क्या IMF से और 1.2 अरब डॉलर मिलेंगे?
पाकिस्तान को IMF से अतिरिक्त 1.2 अरब डॉलर मिलने की संभावना भी जताई गई है। यह राशि दोनों वित्तीय कार्यक्रमों की हालिया समीक्षा पर अधिकारियों के बीच बनी सहमति से जुड़ी है। हालांकि, भुगतान के लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है। ऐसे में चेयरमैनशिप पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक उपलब्धि जरूर है, लेकिन देश की आर्थिक चुनौतियों का समाधान कर्ज कार्यक्रमों, सुधारों और वित्तीय स्थिरता पर निर्भर करेगा।
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