पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोग सड़कों पर क्यों उतरे? क्या पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है? प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के पीछे क्या वजह बताई जा रही है? पीओके में हजारों लोग पाकिस्तान विरोधी नारे क्यों लगा रहे हैं? क्या पीओके में पाकिस्तान की पकड़ कमजोर पड़ रही है?

नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में गुरुवार को एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया, जब पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी कर दी। रिपोर्टों के अनुसार, इस गोलीबारी में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 अन्य घायल हो गए। यह प्रदर्शन शुरुआत में पूरी तरह शांतिपूर्ण था। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सस्ती दरों पर आटा, चावल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों और बेहतर जीवन स्थितियों की मांग कर रहे थे।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

रावलकोट में हजारों लोगों की जुटी भीड़

प्रदर्शन के दौरान रावलकोट के ईदगाह मैदान में लगभग 60,000 से 70,000 लोगों की भीड़ जमा हुई। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की नीतियों और क्षेत्र में उसके नियंत्रण के खिलाफ नारे लगाए। लोग उन लोगों के लिए न्याय की मांग कर रहे थे जो मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में मारे गए थे। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उस घटना में लगभग 30 लोगों की मौत हुई थी और करीब 200 लोग घायल हुए थे।

"ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है" बना विरोध का प्रमुख नारा

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ नारे लगाए। सबसे ज्यादा गूंजने वाला नारा था, "ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है।" यह नारा अब पूरे क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख प्रतीक बन चुका है और लोगों के बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।

खाई गाला गांव में बंद रहे बाजार, निकाला गया विरोध मार्च

हिंसा के बाद खाई गाला गांव के निवासियों ने अपने बाजार बंद कर दिए और विरोध मार्च निकाला। गोलीबारी और झड़पों के बाद कई इलाकों में तनाव का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़कों और खेतों में खून के निशान दिखाई दिए, जबकि कई परिवार अपने लापता या घायल परिजनों की तलाश में जुटे रहे।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

PoK के राजनीतिक कार्यकर्ता और आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल सरदार अमन खान ने कहा कि जान-माल के नुकसान के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान प्रशासन अधिकारों और न्याय की मांग करने वाले लोगों को अक्सर "आतंकवादी" बताकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश करता है।

JAAC और स्थानीय नेताओं ने की स्वतंत्र जांच की मांग

विरोध रैली को स्थानीय राजनीतिक नेताओं और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने अधिकारियों की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया। उन्होंने मृतकों और घायलों के मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील

रैली में मौजूद नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक संस्थाओं से स्थिति पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई चिंता

इस बीच, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी PoJK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की आलोचना की है। संगठन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के अधिकारी अत्यधिक बल का इस्तेमाल कर रहे हैं, असहमति की आवाज को दबा रहे हैं और आगामी क्षेत्रीय चुनावों से पहले लोगों के बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं।एमनेस्टी ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए और स्थिति को संभालने के लिए कानून और मानवाधिकारों के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाना चाहिए।