Rajasthan Viral Desi Fridge Without Electricity: भीषण गर्मी में बिना बिजली और बिना फ्रिज पानी कैसे ठंडा रखें? बिना बिजली पानी ठंडा रखने का देसी तरीका क्या है? क्या बिना बिजली भी पानी बर्फ जैसा ठंडा रह सकता है? क्या है राजस्थान का वायरल ‘देसी फ्रिज’? आखिर कैसे काम करता है ये पारंपरिक वाटर कूलिंग सिस्टम?

Rajasthan Viral Desi Fridge Video: देशभर में भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री के पार जारी है। ऐसे में लोग गर्मी से राहत पाने के लिए पुराने देसी तरीकों की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच राजस्थान का एक अनोखा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग “बिना बिजली वाला देसी फ्रिज” कह रहे हैं। यह वीडियो खासतौर पर इसलिए लोगों का ध्यान खींच रहा है क्योंकि इसमें बेहद साधारण और कम खर्च वाले तरीके से पानी को ठंडा करते हुए दिखाया गया है। सोशल मीडिया यूजर्स इस देसी तकनीक को देखकर हैरान हैं और पुराने समय के लोगों की समझदारी की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

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क्या है वायरल वीडियो में दिख रहा देसी कूलिंग सिस्टम?

वायरल क्लिप में एक मिट्टी के घर के अंदर बनाया गया पारंपरिक वाटर कूलिंग सिस्टम दिखाई देता है। इसमें एक लंबा पाइप लगा है, जिसके चारों तरफ मोटी रस्सीनुमा कपड़े की परत लपेटी गई है। यह उस तरह का कपड़ा माना जा रहा है, जिसे गांवों में पानी की मटकी या बोतलों को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। पाइप के ऊपरी हिस्से में पानी डालने की जगह बनाई गई है, जबकि नीचे एक छोटा नल लगा हुआ है, जहां से ठंडा पानी निकाला जाता है। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के मुताबिक, कपड़े की परत हमेशा गीली रखी जाती है। गर्म हवा जब गीले कपड़े से गुजरती है तो पानी का तापमान प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। यही वजह है कि बिना बिजली के भी पानी काफी ठंडा महसूस होता है। नीचे देखें वीडियो-

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कैसे काम करता है ये नेचुरल फ्रिज?

यह तकनीक पूरी तरह इवैपोरेशन कूलिंग यानी वाष्पीकरण आधारित कूलिंग सिस्टम पर काम करती है। यही सिद्धांत पुराने समय में मिट्टी की मटकी, सुराही और खस के पर्दों में इस्तेमाल होता था। जब गीले कपड़े से पानी धीरे-धीरे वाष्पित होता है, तब आसपास की गर्मी को अपने साथ खींच लेता है। इससे पाइप के अंदर मौजूद पानी का तापमान कम हो जाता है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में बिजली की जरूरत नहीं पड़ती। विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान जैसे शुष्क और रेगिस्तानी इलाकों में यह तकनीक ज्यादा असरदार होती है क्योंकि वहां हवा में नमी कम होती है और पानी तेजी से वाष्पित होता है।

दावा- 1950 से इस्तेमाल हो रही है पानी ठंडा करने की ये तकनीक

सोशल मीडिया पर वायरल कई पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राजस्थान के गांवों में इस तरह की तकनीक 1950 के दशक से इस्तेमाल की जा रही है। बिजली और फ्रिज आम घरों तक पहुंचने से पहले लोग इसी तरह प्राकृतिक तरीकों से पानी ठंडा रखते थे। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन गांवों में मटकी, सुराही और पारंपरिक कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल दशकों से होता आया है।

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सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए मजेदार रिएक्शन

वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स लगातार इस देसी जुगाड़ की तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों ने लिखा कि पुराने जमाने के लोग सच में साइंटिस्ट थे, जबकि कुछ यूजर्स ने इसे भारत का असली इको-फ्रेंडली फ्रिज बताया। एक यूजर ने कमेंट किया, आज भी गांवों में ऐसी तकनीकें बिजली से ज्यादा भरोसेमंद हैं। वहीं एक और यूजर ने लिखा, महंगे फ्रिज से बेहतर है ये देसी तरीका, कम खर्च और नेचुरल कूलिंग।

आज भी क्यों जरूरी हैं ऐसे देसी तरीके?

भारत के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी बिजली की समस्या बनी रहती है। ऐसे में कम लागत वाले पारंपरिक कूलिंग सिस्टम लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। बढ़ती गर्मी और बिजली की खपत के बीच यह वायरल वीडियो लोगों को पुराने भारतीय ज्ञान और देसी जुगाड़ की याद दिला रहा है। गर्मी के इस मौसम में राजस्थान का यह ‘देसी फ्रिज’ सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि पुराने समय में लोग प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर कैसे मुश्किल मौसम का सामना करते थे।