Ram Temple Donation Case: यूपी SIT की रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट में पैसों के मैनेजमेंट का कोई प्रोफेशनल तरीका नहीं है। साथ ही, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की भूमिका को भी कठघरे में खड़ा किया गया है।
नई दिल्ली: राम मंदिर चंदा संग्रह में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। रिपोर्ट में ट्रस्ट के कामकाज में गंभीर खामियों की बात कही गई है, हालांकि पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के खिलाफ व्यक्तिगत गबन या गलत मंशा का कोई सबूत नहीं मिला।
ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पर उठे सवाल
तीन सदस्यीय SIT ने अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चंदे के संग्रह और उसके बैंक खातों में जमा होने के बीच पर्याप्त निगरानी और जांच व्यवस्था नहीं थी। ट्रस्ट में पेशेवर वित्तीय प्रबंधन की कमी और अलग वित्त एवं ऑडिट सेल नहीं होने की बात भी सामने आई।
चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट
रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ चंदे की रकम के व्यक्तिगत दुरुपयोग या जानबूझकर गड़बड़ी करने का कोई प्रमाण नहीं मिला। दोनों ने 25 जून को बढ़ते विवाद और विपक्ष के हमलों के बीच अपने पदों से इस्तीफा दिया था। SIT ने उनकी भूमिका को लेकर लगे आरोपों की जांच की, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर गलत मंशा का सबूत नहीं पाया।
पूर्व ड्राइवर को बताया कथित मास्टरमाइंड
जांच में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम कथित तौर पर फंड डायवर्जन के मुख्य सूत्रधार के रूप में सामने आया। यादव पहले चंपत राय के सहयोगी और ड्राइवर के तौर पर काम कर चुके हैं। वह उन आठ लोगों में शामिल हैं, जिन्हें चंदे की रकम में कथित हेरफेर के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
चंदे की रकम से जमीन और कारोबार में निवेश का आरोप
SIT ने बैंक लेनदेन, संपत्ति सौदों और निवेश की जांच के जरिए कथित तौर पर रकम के रास्ते का पता लगाने की कोशिश की। जांच में दावा किया गया कि मंदिर के नाम पर जमा होने वाले चंदे का एक हिस्सा बैंक तक पहुंचने से पहले ही कथित रूप से डायवर्ट किया गया और बाद में अयोध्या व आसपास के जिलों में जमीन, व्यावसायिक प्लॉट और निजी कारोबार में लगाया गया।
आठ आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
मामला 7 जून को समाजवादी पार्टी नेता तेज नारायण ‘पवन’ पांडे के आरोपों के बाद सामने आया था। उन्होंने मंदिर चढ़ावे से 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का आरोप लगाया था। इसके बाद 13 जून को SIT गठित की गई। मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने पिछले महीने आरोपियों से करीब 79.85 लाख रुपये भी बरामद किए थे।
SBI की भूमिका पर भी सवाल
SIT ने ट्रस्ट के मुख्य बैंक खाते से जुड़े भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में नकदी और चेक वाले लिफाफे बैंक शाखाओं तक भेजे गए, लेकिन उनके सत्यापन और मिलान की प्रक्रिया में जरूरी प्रोटोकॉल का पर्याप्त पालन नहीं हुआ। SIT ने बैंक के शीर्ष प्रबंधन के स्तर पर मामले की समीक्षा और भविष्य में बड़े चंदा अभियानों के लिए सख्त दिशानिर्देश बनाने की सिफारिश की है।
सुप्रीम कोर्ट की SIT भी कर रही जांच
उत्तर प्रदेश सरकार की SIT की रिपोर्ट सामने आने के बावजूद मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को एक अलग SIT गठित की थी, जिसकी जांच अभी जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और तथ्य सामने आने की संभावना बनी हुई है।


