Ram Temple Donation Theft Case: अयोध्या राम मंदिर में दान की गिनती के दौरान कथित अनियमितताओं के मामले में SIT ने 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पूर्व ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल कुमार मिश्रा और चंपत राय समेत 133 लोगों को अभियोजन गवाह बनाया गया है। जांच में CCTV से कथित तौर पर 105 घटनाओं का पता चला है।
Anil Kumar Mishra: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं से मिले दान की गिनती के दौरान कथित अनियमितताओं के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। मामले में पूर्व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल कुमार मिश्रा और चंपत राय को अभियोजन पक्ष के गवाहों की सूची में शामिल किया गया है। दोनों उन 133 गवाहों में शामिल हैं, जिनके नाम चार्जशीट में दर्ज हैं।
राम मंदिर दान मामले में 8 लोगों पर चार्जशीट
SIT ने मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। आरोपियों के नाम अविनाश शुक्ला उर्फ शनि, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू हैं। इन सभी को जून में गिरफ्तार किया गया था।
चार्जशीट में आपराधिक विश्वासघात, अपराध से जुड़ी संपत्ति और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराएं भी लगाई गई हैं। जांच में कथित तौर पर दान की रकम के हिसाब-किताब, नकदी की आवाजाही और आरोपियों के वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की गई।
दान की गिनती के दौरान कैश हटाने के 105 मामले
SIT की जांच में सबसे अहम बात मंदिर परिसर में दान की रकम की गिनती से जुड़ी सामने आई। जांचकर्ताओं के मुताबिक, CCTV फुटेज में 105 ऐसे मामले मिले, जिनमें नकदी को कथित तौर पर बिना अनुमति हटाने या छिपाने की घटनाएं दर्ज हुईं। इन घटनाओं को लेकर CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और दान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।
जांच का एक अलग हिस्सा मंदिर में गिनी गई रकम के बैंक तक पहुंचने की प्रक्रिया से जुड़ा था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, SIT को बैंक में रकम जमा होने तक के चरण में कथित नकदी गड़बड़ी के प्रमाण नहीं मिले। यानी जांच में मुख्य फोकस दान की गिनती के दौरान हुई कथित अनियमितताओं पर रहा।
चंपत राय और अनिल मिश्रा से भी हुई पूछताछ
पूर्व ट्रस्ट पदाधिकारी चंपत राय और अनिल कुमार मिश्रा उस अवधि में ट्रस्ट में अहम जिम्मेदारियों पर थे, जिस दौरान दान की रकम को संभालने की व्यवस्था जांच के दायरे में आई। SIT ने उनसे भी दान की गिनती और नकदी प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर पूछताछ की थी।
चार्जशीट में उनका नाम आरोपी के तौर पर नहीं, बल्कि अभियोजन गवाहों की सूची में शामिल किया गया है। इस सूची में मामले के शिकायतकर्ता और उस समय ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव रहे कृष्ण मोहन तथा पूर्व विशेष आमंत्रित सदस्य और VHP पदाधिकारी गोपाल एम. नागकट्टे उर्फ गोपाल राव भी शामिल हैं।
जांच में CCTV से लेकर बैंक रिकॉर्ड तक खंगाले गए
SIT ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए कई स्तरों पर सबूत जुटाए। इसमें CCTV फुटेज, बैंक खातों और जमा रिकॉर्ड, मोबाइल फोन से जुड़ा इलेक्ट्रॉनिक डेटा, संपत्ति और वाहन खरीद से संबंधित जानकारी तथा अन्य वित्तीय दस्तावेज शामिल रहे।
जांच के दौरान आठ आरोपियों से करीब 79.85 लाख रुपये नकद बरामद होने की जानकारी भी सामने आई है। जांचकर्ताओं ने कथित धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल का पता लगाने के लिए वित्तीय लेनदेन और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल की।
803 कीमती दान की वस्तुओं में नहीं मिली गड़बड़ी
SIT ने सिर्फ नकदी की जांच नहीं की, बल्कि मंदिर को मिले कीमती दान की वस्तुओं का भी सत्यापन किया। जांच में ट्रस्ट के सॉफ्टवेयर में दर्ज 803 कीमती वस्तुओं का भौतिक सत्यापन किया गया और उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार इनमें कोई विसंगति नहीं मिली। इसके अलावा बिना रसीद वाली कुछ अन्य कीमती वस्तुओं का भी सत्यापन किया गया।
इस तरह SIT की जांच में दान की नकदी की गिनती के दौरान कथित अनधिकृत गतिविधियों और कीमती वस्तुओं के सत्यापन को अलग-अलग स्तरों पर देखा गया है। अब मामले में दाखिल चार्जशीट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत में चलेगी।
