ईरान पर इज़राइल-US स्ट्राइक के बाद मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन के बीच ईरान के UAVs ने रियाद में US एम्बेसी कंपाउंड को टक्कर मारी, जिससे आग लग गई। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। सऊदी डिप्लोमैटिक क्वार्टर से ड्रोन हमले का वीडियो सामने आया है।
Riyadh Drone Strike Sparks Fresh Middle East Escalation: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद (Riyadh) में स्थित अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला होने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो बिना पायलट वाले हवाई वाहन (UAV (Unmanned Aerial Vehicles)) ने US एम्बेसी रियाद के कंपाउंड को निशाना बनाया। धमाके के बाद परिसर के अंदर आग लग गई और दूर तक धुआं उठता देखा गया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान और इजराइल के बीच हालिया हमलों के बाद पूरा इलाका पहले से ही हाई अलर्ट पर है।
क्या हमले के पीछे Iran Drone Strike का हाथ है?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्रोन छत और चांसरी बिल्डिंग के बाहरी हिस्से से टकराए। शुरुआती जांच में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। सऊदी डिफेंस मिनिस्ट्री ने इसे लिमिटेड फायर (limited fire) बताया है, यानी आग सीमित थी और नुकसान भी कम बताया गया है। हालांकि अभी तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन शुरुआती शक ईरानी ड्रोन पर जताया जा रहा है।मिडिल ईस्ट कॉन्फ्लिक्ट (Middle East Conflict) के मौजूदा हालात को देखते हुए इस हमले को संभावित जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है।
क्या Middle East Tension अब Gulf देशों तक फैल रहा है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, धुआं रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर से उठता देखा गया, जहां कई विदेशी मिशन मौजूद हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके को घेर लिया और अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के ड्रोन अटैक जारी रहते हैं, तो गल्फ रीजन में अस्थिरता और बढ़ सकती है। इससे न सिर्फ सऊदी अरेबिया बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार पर असर पड़ सकता है।
क्या US Embassy Attack से बढ़ेगा Israel-Iran War का दायरा?
इस हमले को हालिया Israel-US स्ट्राइक और उसके बाद बढ़े ईरान-इज़राइल टकराव से जोड़कर देखा जा रहा है। मिडिल ईस्ट पहले ही मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में है। ऐसे में रियाद ड्रोन अटैक ने एक नई चिंता पैदा कर दी है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील हैं। सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हैं और मिडिल ईस्ट वार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगाहें टिकी हुई हैं। यदि तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर क्षेत्रीय राजनीति, सुरक्षा समीकरण और तेल की कीमतों पर साफ दिखाई दे सकता है। Middle East Crisis की यह ताजा घटना बताती है कि हालात अभी स्थिर नहीं हैं और आने वाले दिन निर्णायक हो सकते हैं।


