Chandranath Rath Murder Investigation: बंगाल में चुनाव के बाद सनसनीखेज राजनीतिक हत्या। सुवेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की 3 दिन की साज़िश, शेड्यूल ट्रैकिंग, CCTV निगरानी और 9mm गोलीबारी से टारगेट किलिंग। CID जांच, SIT गठित, चुनावी हिंसा और राजनीतिक बदले का खौफनाक खुलासा सामने आया।

Suvendu Adhikari PA shooting Case: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल उस वक्त खून-खराबे में बदल गई जब मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में शामिल नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना चुनाव परिणामों के महज 48 घंटे के भीतर हुई, जिसने राज्य की राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना मध्यमग्राम इलाके के पास रात करीब 10 बजे हुई, जब रथ एक सरकारी वाहन में यात्रा कर रहे थे। तभी हमलावरों ने सुनियोजित तरीके से उनका रास्ता रोका और नजदीक से ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। अब इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया हैं, जो काफी चौंकाने वाला है। इसके अलावा पुलिस ने भी इसे पूर्व नियोजित घटना माना है। 

तीन दिन की खतरनाक साज़िश: निगरानी से लेकर घात तक

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि पिछले तीन दिनों से इसकी योजना बनाई जा रही थी। वरिष्ठ जांच अधिकारी के अनुसार, पीड़ित की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी और उनके पूरे शेड्यूल की रेकी की गई थी। सीसीटीवी फुटेज से यह भी संकेत मिला है कि हमलावरों ने पहले से इलाके की रेकी की थी और एक कार की मदद से रथ का रास्ता रोका गया, जबकि बाइक सवार हमलावरों ने नजदीक से गोलीबारी की। कुल चार गोलियां सिर, छाती और पेट में लगीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

Scroll to load tweet…

अत्याधुनिक हथियार और संगठित गिरोह का शक

जांच एजेंसियों को घटनास्थल से 9mm कारतूस के खोखे मिले हैं, जिससे साफ है कि इस हमले में आधुनिक और ऑटोमैटिक हथियार का इस्तेमाल हुआ। पुलिस का मानना है कि इसमें कम से कम तीन से चार लोग शामिल थे और यह एक प्रशिक्षित और संगठित हमला था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कोई भीड़ हिंसा नहीं, बल्कि एक टारगेटेड किलिंग थी, जिसमें हर कदम पहले से तय था-रास्ता रोकना, घेराबंदी करना और फिर तेजी से हमला कर फरार हो जाना।

Scroll to load tweet…

CID जांच और राजनीतिक तनाव का बढ़ता साया

इस हाई-प्रोफाइल हत्या की जांच अब CID को सौंप दी गई है और एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस को कई अहम CCTV फुटेज और संदिग्ध वाहन की जानकारी मिली है, जिससे जांच आगे बढ़ रही है। यह घटना उस समय हुई है जब राज्य में चुनाव के बाद राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है। बीते वर्षों में बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार की हत्या का तरीका बेहद सुनियोजित और पेशेवर माना जा रहा है।

चुनावी जीत पर भारी पड़ती हिंसा की परछाईं

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक हिंसा के स्वरूप का संकेत है-जहां अब भीड़ हिंसा की जगह टारगेटेड और प्लान्ड किलिंग ले रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह मामला न केवल एक राजनीतिक हत्या का रहस्य बना हुआ है, बल्कि पूरे राज्य में सत्ता, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गहरे सवाल भी छोड़ रहा है।