Swatantra Bhardwaj Case: स्वतंत्र भारद्वाज को सिर्फ 24 घंटे की कस्टडी पर निशू आजाद के वकील ने सवाल उठाए हैं। जज के घर पेशी को अजीब बताते हुए पूछा, आखिर क्या छिपाया जा रहा?
Swatantra Bhardwaj Controversy: निशू आजाद के पिता पर जंतर-मंतर पर हुए कथित हमले का मामला अब एक और वजह से चर्चा में है। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को शनिवार को दिल्ली की अदालत ने एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है। लेकिन इस रिमांड के तरीके और कोर्ट की कार्रवाई को लेकर निशू आजाद के वकील ऋषव रंजन ने कई सवाल उठाए हैं। पीड़ित पक्ष के वकील का दावा है कि वे कोर्ट रूम में सुनवाई शुरू होने का इंतजार कर रहे थे और इसी दौरान उन्हें पता चला कि आरोपी को जज के घर पर पेश किया गया। वहीं दूसरी ओर वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...
स्वतंत्र भारद्वाज का पूरा मामला क्या है?
यह मामला जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान नाबालिग एक्टिविस्ट निशू आजाद के पिता के साथ मारपीट का आरोप लगा था। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज का नाम सामने आया। बाद में एक इंटरव्यू के दौरान भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया कि उन्होंने निशू के पिता के सिर पर हमला किया था। इसी इंटरव्यू के बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया और उनकी गिरफ्तारी की मांग भी तेज हो गई। हालांकि, भारद्वाज ने बाद में एक पॉडकास्ट में दावा किया कि उन्होंने ये कदम सेल्फ डिफेंस में उठाया था।
स्वतंत्र भारद्वाज ने क्या दावा किया था?
मामले ने उस वक्त ज्यादा तूल पकड़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक इंटरव्यू सामने आया। इसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने निशू आजाद के पिता के सिर पर हमला किया था और उन्हें कई टांके लगे थे। उन्होंने ये भी दावा किया था कि यह हमला किस तरह के कानूनी प्रावधान के तहत आता है। इसी बयान के बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस की पहले की जानकारी के मुताबिक पीड़ित की चोटों को 'सिंपल' बताया गया था और चोट का कारण स्टील ब्रेसलेट बताया गया था।
शुक्रवार को बुलंदशहर से हिरासत में लिए गए भारद्वाज
स्वतंत्र भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया। ये कार्रवाई उस समय हुई जब CJP की ओर से संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने केस में आगे की कार्रवाई की। शुक्रवार को FIR में SC-ST (Prevention of Atrocities) Act से जुड़े प्रावधान और आपराधिक धमकी की धाराएं जोड़े जाने की बात सामने आई। इसके अलावा भारद्वाज के खिलाफ एक POCSO केस भी दर्ज किया गया है।
शनिवार को कोर्ट में पेशी और फिर सिर्फ एक दिन की कस्टडी
शनिवार को स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। जिस पर पीड़ित पक्ष के वकील ने कोर्ट की प्रक्रिया और रिमांड को लेकर सवाल उठाए। निशू आजाद के वकील ऋषव रंजन ने इस फैसले को 'अजीब'‘बताया।
हम कोर्ट रूम में इंतजार करते रहे और फैसला जज के घर से हो गया- वकील
कोर्ट के आदेश के बाद सामने आए एक बयान में वकील ऋषभ रंजन ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए कई खुलासे किए। ऋषभ रंजन के अनुसार, वह खुद कोर्ट रूम में मौजूद थे और मामले की सुनवाई शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को कोर्ट रूम में पेश करने के बजाय सीधे जज के आवास पर पेश किया गया। इतना ही नहीं, आरोपी पक्ष के वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए सुनवाई से जुड़े और वहीं से एक दिन की पुलिस कस्टडी का आदेश जारी हो गया।
समझ नहीं आ रहा क्या छिपाया जा रहा है?- वकील
पीड़ित पक्ष के वकील ने इतनी गंभीर घटना में महज 24 घंटे की पुलिस रिमांड मांगे जाने पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा, 'इतने गंभीर अपराध में केवल एक दिन की पुलिस कस्टडी मांगी गई। हमें यह तक नहीं बताया गया कि एफआईआर में कौन-कौन सी नई धाराएं जोड़ी गई हैं और क्या बदलाव किए गए हैं। मुझे नहीं पता कि आखिर क्या छिपाया जा रहा है।' वकील ने ये भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने अब तक आरोपी पर जोड़ी गई धाराओं को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया है।


