टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस की जांच में हथियारों की सप्लाई का नया कनेक्शन सामने आया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अमृतसर में ‘डेड लेटर बॉक्स’ से हथियार लेकर दो महिला कूरियर उन्हें मुंबई पहुंचाने आई थीं। लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े इस मामले की पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Tiger Shroff Firing: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए जानलेवा हमले की जांच में हर दिन एक नया और चौंकाने वाला खुलासा हो रहा है। मुंबई के जुहू इलाके में हुई इस फायरिंग की घटना को अंजाम देने के लिए हथियारों की सप्लाई किस तरह की गई थी, इसका पर्दाफाश हो चुका है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार अमृतसर से एक बेहद शातिर तरीके यानी 'डेड लेटर बॉक्स' के जरिए मंगवाए गए थे, ताकि किसी को भनक तक न लगे। दावा है कि दो महिला कूरियर बैग में छिपाकर हथियार मुंबई लाई थीं।

क्या है 'डेड लेटर बॉक्स' तरीका और कैसे मिले हथियार?

जांच में सामने आया है कि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड गैंगस्टर अनिल पंडित था, जो विदेश में बैठकर अपने गुर्गों को निर्देश दे रहा था।

  • गुप्त जगह पर हथियारों की डिलीवरी: 'डेड लेटर बॉक्स' एक ऐसा तरीका होता है जिसमें बिना आमने-सामने मिले या एक-दूसरे को जाने, किसी तय जगह पर सामान (हथियार) छोड़ दिया जाता है।
  • कुणाल और सुमित की भूमिका: अनिल पंडित के कहने पर सोनीपत जेल से हाल ही में छूटा कुणाल और उसका साथी सुमित अमृतसर गए थे। उन्हें नहीं पता था कि हथियार वहां किसने रखे थे, लेकिन उन्हें एक गुप्त जगह से बैग मिल गया था।
  • पैसों का लेन-देन: इस काम के लिए मास्टरमाइंड ने कुणाल को 70 से 80 हजार रुपये दिए थे, जिसमें से कुछ पैसे दो महिलाओं को कूरियर के रूप में काम करने के लिए दिए गए।

महिला कोरियर के जरिए मुंबई पहुंचे हथियार

हथियारों को अमृतसर से मुंबई तक पहुंचाने का जिम्मा दो महिलाओं-राधा और बबीता-को सौंपा गया था।

  • गर्लफ्रेंड को बनाया जरिया: आरोपी कुणाल ने अपनी गर्लफ्रेंड राधा और उसकी साथी बबीता को इस खतरनाक काम में शामिल किया। सोनीपत की एक फैक्ट्री में काम करने वाली इन दोनों महिलाओं ने हथियारों से भरा बैग उठाया और मुंबई के लिए निकल पड़ीं।
  • एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल: पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी लगातार एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे और मास्टरमाइंड के निर्देशों का पालन कर रहे थे।

जुहू में कब और कैसे हुआ था हमला?

18 अक्टूबर की शाम को जब टाइगर श्रॉफ जुहू के पुष्पा नरसी पार्क के पास फुटबॉल खेलकर अपनी कार से लौट रहे थे, तब मोटरसाइकिल सवार तीन हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ 7 गोलियां बरसा दीं। हालांकि किस्मत अच्छी थी कि टाइगर को गोली नहीं लगी, लेकिन उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गए। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है, और पुलिस अब इस पूरे हथियार तस्करी नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए तेजी से छानबीन कर रही है।