तृणमूल कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची भेजी है, जबकि दूसरी ओर अलग कमेटी के दावे भी सामने आए हैं। जानिए पूरा मामला।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व को लेकर शुरू हुई खींचतान अब चुनाव आयोग तक पहुंच गई है। हालिया घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पार्टी के आधिकारिक संगठन और नेतृत्व को लेकर अंतिम फैसला किस दिशा में जाएगा।

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चुनाव आयोग को भेजी गई अलग-अलग दावेदारी

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर उभरे एक गुट की ओर से नई ‘नेशनल वर्किंग कमेटी’ का गठन किए जाने का दावा किया गया। इस प्रस्तावित समिति में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी का नाम शामिल नहीं बताया गया, जबकि कुछ अन्य नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गईं। इसी बीच ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग को पत्र भेजकर अपनी ओर से पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची सौंप दी है। बताया जा रहा है कि इस सूची में करीब 24 नेताओं के नाम शामिल हैं। इसमें ममता बनर्जी को चेयरपर्सन और अभिषेक बनर्जी को अखिल भारतीय महासचिव के रूप में दर्शाया गया है।

संगठन पर नियंत्रण की लड़ाई तेज

ममता समर्थक खेमे की ओर से भेजी गई सूची में कई वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारियां दी गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव आयोग को दस्तावेज भेजने की यह कवायद संगठनात्मक वैधता को लेकर अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

जनता और कार्यकर्ताओं का रुख होगा अहम

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे मामलों में चुनाव आयोग, पार्टी संविधान और कानूनी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि अंतिम राजनीतिक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि जमीनी स्तर पर पार्टी का समर्थन किस नेतृत्व को मिलता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावे मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की भूमिका और पार्टी के भीतर समर्थन का संतुलन इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।

तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी है, इसलिए संगठन के भीतर पैदा हुई यह स्थिति राज्य की राजनीति पर भी असर डाल सकती है। फिलहाल सभी निगाहें चुनाव आयोग और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि पार्टी का आधिकारिक संगठनात्मक ढांचा किस स्वरूप में सामने आता है।