डोनाल्ड ट्रंप की रहस्यमयी “Calm Before The Storm” पोस्ट ने US-Iran Tension, Hormuz Strait Crisis और Operation Epic Fury को लेकर दुनिया भर में सनसनी फैला दी है। AI सैन्य तस्वीर, परमाणु ठिकानों पर हमले की चर्चाएं और पेंटागन की गुप्त तैयारियों के बीच सवाल गहरा रहा है-क्या अमेरिका और ईरान एक नए विनाशकारी युद्ध के बेहद करीब पहुंच चुके हैं?
Trump Iran Warning: दुनिया इस वक्त एक बार फिर महायुद्ध की कगार पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सैन्य गलियारों में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने अपने आधिकारिक अकाउंट पर एक ऐसी रहस्यमयी और डरावनी चेतावनी दी है, जिसके बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच कुछ ही समय का युद्धविराम अब खत्म होने वाला है और पेंटागन एक बहुत बड़े सैन्य हमले की तैयारी कर चुका है।


'तूफ़ान से पहले की शांति': उस AI तस्वीर के पीछे का खौफनाक संकेत
रविवार को डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सिर्फ सात शब्द लिखे-"यह तूफ़ान से पहले की शांति थी" (It Was The Calm Before The Storm)। लेकिन बात सिर्फ इन शब्दों की नहीं थी; इस पोस्ट के साथ ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनी एक बेहद आक्रामक तस्वीर भी शेयर की। तवीर में ट्रंप खुद अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर 'MAGA' टोपी पहने खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि उनके बैकग्राउंड में आसमान में बिजली कड़क रही है, समुद्र में भयानक तूफान उठा हुआ है और सामने ईरानी नौसैनिक जहाज घिरे नजर आ रहे हैं। भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह तस्वीर महज एक ग्राफिक नहीं, बल्कि ईरान के लिए खुली चेतावनी है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट को लेकर अमेरिका का सब्र अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।

'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का पुनर्जन्म: पेंटागन का गुप्त प्लान
"बीजिंग से लौटते समय Air Force One में ट्रंप के सामने 'ईरान पर महा-फैसले' की फाइलें टेबल पर थीं..." 'न्यूयोर्क टाइम्स' की एक विस्फोटक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन बंद कमरे में ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। दरअसल, पिछले महीने ट्रंप ने जिस युद्धविराम का एलान किया था, उसके बाद पेंटागन ने "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" (Operation Epic Fury) को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। लेकिन अब अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के नेतृत्व में इस ऑपरेशन को दोबारा एक्टिवेट करने की आपातकालीन योजनाएं तैयार कर ली गई हैं।

इस्फ़हान परमाणु केंद्र को उड़ाने का प्लान: जमीन के नीचे घुसेंगे स्पेशल कमांडोज
- इस बार अमेरिका का टारगेट सिर्फ ईरान की सीमाएं नहीं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी खुफिया तंत्र और सैन्य रणनीतिकार दो बेहद खतरनाक विकल्पों पर काम कर रहे हैं:
- सैन्य अड्डों पर चौतरफा बमबारी: ईरानी सेना और उनके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर हवाई हमलों का विस्तार करना।
- परमाणु ठिकाने पर सर्जिकल स्ट्राइक: ईरान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली 'इस्फ़हान परमाणु सुविधा' (Isfahan nuclear facility) को नेस्तनाबूत करना। इसके लिए जमीन के काफी नीचे दबी परमाणु सामग्री को नष्ट करने के लिए सैकड़ों अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांडोज को पहले ही मध्य पूर्व (Middle East) भेजा जा चुका है। अधिकारियों ने खुद माना है कि इस मिशन में "दोनों तरफ से जान-माल के नुकसान का बहुत बड़ा जोखिम" है।

"हम भी तैयार हैं..." बीजिंग की टेंशन के बीच ईरान की जवाबी हुंकार
ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़ ने पलटवार करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "हमारी सेना किसी भी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।"

होरमुज़ जलडमरूमध्य बना दुनिया की धड़कन
गौरतलब है कि ईरान द्वारा दुनिया के सबसे मुख्य तेल शिपिंग मार्ग 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' को बंद किए जाने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है और भारत में भी इसका असर ईंधन की बढ़ती कीमतों (पेट्रोल-डीजल और सीएनजी) के रूप में दिखने लगा है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा है, "हम नहीं चाहते कि उनके पास परमाणु हथियार हों और हम चाहते हैं कि जलडमरूमध्य खुला रहे। मैं अब ज्यादा सब्र नहीं रखूंगा।" भले ही भारत की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची को बातचीत की उम्मीद है, लेकिन ट्रंप की इस 'तूफान' वाली पोस्ट ने साफ कर दिया है कि बातचीत की मेज से ज्यादा, युद्ध के मैदान सजने की तैयारी हो चुकी है।

