UIDAI New Update: आधार कार्ड की फोटोकॉपी देने से जल्द मिल सकती है मुक्ति। UIDAI ने 300 से ज्यादा संस्थाओं को डिजिटल वेरिफिकेशन से जोड़ा है। जानिए आधार ऐप से कैसे होगा सुरक्षित और पेपरलेस सत्यापन।

होटल में कमरा बुक करना हो या अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होना हो, आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करना आम बात है। लेकिन अब यह पुराना तरीका बदलने वाला है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार आधारित डिजिटल वेरिफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए 300 से ज्यादा नई संस्थाओं को अपने ऑफलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम से जोड़ा है। इससे लोगों को बार-बार आधार की कॉपी देने की जरूरत कम होगी और उनकी निजी जानकारी भी ज्यादा सुरक्षित रह सकेगी।

300 से ज्यादा संस्थाओं को UIDAI ने जोड़ा

UIDAI ने होटल, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, इवेंट मैनेजमेंट और गिग इकॉनमी से जुड़ी करीब 300 संस्थाओं को ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (OVSEs) के रूप में रजिस्टर किया है। इसका मकसद पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाना है। यानी अब संस्थाएं कागजी दस्तावेजों के बजाय डिजिटल माध्यम से पहचान की पुष्टि कर सकेंगी।

यह भी पढ़ें: Bengaluru Mass Murder: 1 सिलबट्टा, 7 कत्ल और पार्टी का बहाना! पत्नी से खफा कैब ड्राइवर का खूनी खेल

आधार ऐप से होगा डिजिटल वेरिफिकेशन

इस नई व्यवस्था में आधार ऐप की अहम भूमिका होगी। किसी होटल, अस्पताल या दूसरी सेवा का लाभ लेते समय यूजर ऐप के जरिए अपनी पहचान सत्यापित कर सकेगा। खास बात यह है कि यूजर खुद तय कर सकेगा कि सामने वाली संस्था के साथ कौन-सी जानकारी साझा करनी है। उदाहरण के लिए, जरूरत के मुताबिक सिर्फ नाम और फोटो जैसी जानकारी दी जा सकेगी।

12 अंकों का आधार नंबर भी रहेगा सुरक्षित

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत प्राइवेसी है। डिजिटल वेरिफिकेशन के दौरान यूजर का 12 अंकों वाला आधार नंबर संबंधित संस्था के साथ साझा नहीं किया जाएगा। इसके अलावा वेरिफिकेशन करने वाली संस्थाओं को UIDAI के केंद्रीय डेटाबेस से सीधे जुड़ने की जरूरत भी नहीं होगी। इससे आधार नंबर और दूसरी संवेदनशील जानकारियों के गलत इस्तेमाल का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी।

7.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड हुआ आधार ऐप

UIDAI के आंकड़ों के मुताबिक, आधार ऐप को अब तक करीब 7.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। लगभग 86 लाख लोग ऐप के जरिए आधार केंद्र जाए बिना अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट कर चुके हैं। वहीं, बायोमेट्रिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए यूजर्स ने 4.6 करोड़ से ज्यादा बार लॉक और अनलॉक फीचर का इस्तेमाल किया है।

DPDP एक्ट के मुताबिक मजबूत होगी डेटा प्राइवेसी

UIDAI की यह पहल डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून की भावना के अनुरूप है। इस कानून के तहत नागरिकों की निजी जानकारी उनकी सहमति से और जरूरत के मुताबिक ही इस्तेमाल की जानी चाहिए। हालांकि, नई व्यवस्था के लागू होने के बाद भी यह देखना जरूरी होगा कि कितनी संस्थाएं इसे अपनाती हैं और यूजर्स को इसका लाभ किस स्तर पर मिलता है।

यह भी पढ़ें: Bashir Zeb News: BLA कमांडर-इन-चीफ ने छोड़ा पद! अब जहर देने का दावा, कंधार में आखिर क्या हुआ?