यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होगा। 397 विधायकों के हिसाब से एक सीट के लिए 37 वोट चाहिए। मौजूदा संख्या बल में BJP-NDA और सपा के गणित से समझिए 10वीं सीट का पूरा समीकरण।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा चुनाव ने सियासी गणित को दिलचस्प बना दिया है। राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और उसी दिन नतीजे भी आएंगे। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी, 6 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख, 7 अक्टूबर को जांच और 9 अक्टूबर नाम वापसी की अंतिम तारीख होगी।

10 सीटों पर किसका कितना दावा?

उत्तर प्रदेश की इन 10 सीटों में फिलहाल आठ भाजपा, एक समाजवादी पार्टी और एक बसपा के पास है। इनमें भाजपा के आठ मौजूदा सदस्य Dinesh Sharma, Seema Dwivedi, Neeraj Shekhar, Arun Singh, BL Verma, Geeta Shakya, Hardeep Singh Puri और Brij Lal हैं।

सपा से Ram Gopal Yadav और बसपा से Ramji Gautam का कार्यकाल खत्म हो रहा है। दिनेश शर्मा पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। चुनाव में विधायक वोट डालेंगे। विधानसभा की प्रभावी संख्या 397 होने के कारण एक सीट के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट का आंकड़ा बनता है।

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BJP-NDA के पास 7 से 8 सीटों का गणित

उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 256 विधायक हैं। अपना दल (एस) के 13, RLD के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं। यानी इन प्रमुख NDA सहयोगियों के साथ संख्या 289 तक पहुंचती है। विधानसभा के आधिकारिक आंकड़ों में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 और 3 असंबद्ध सदस्य भी दर्ज हैं।

37 वोट के हिसाब से 7 उम्मीदवारों के लिए 259 वोट चाहिए। इसलिए मौजूदा संख्या बल के आधार पर NDA के लिए सात सीटों का गणित मजबूत है। अतिरिक्त समर्थन मिलने पर आठवीं सीट का समीकरण भी बन सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की संख्या, प्रथम वरीयता वोट और मतदान के दौरान समर्थन पर निर्भर करेगी।

सपा के पास 2 सीटों का आधार

सपा के विधानसभा में 101 विधायक हैं। कांग्रेस के दो विधायक भी हैं। यदि दोनों का समर्थन सपा को मिलता है तो संख्या 103 हो जाती है। दो सीटों के लिए 74 वोट जरूरी होंगे। ऐसे में मौजूदा आंकड़ों के आधार पर सपा खेमे के पास दो उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त संख्या है। यही वजह है कि 10 सीटों के मौजूदा गणित में सबसे ज्यादा चर्चा उस अतिरिक्त सीट को लेकर है, जो सात NDA और दो सपा उम्मीदवारों के बाद बचती है।

BSP के सामने सीट बचाने की चुनौती

बसपा के लिए समीकरण सबसे कठिन है। पार्टी के पास फिलहाल उत्तर प्रदेश विधानसभा में कोई विधायक नहीं है। ऐसे में 37 प्रथम वरीयता वोट का आंकड़ा अपने दम पर हासिल करना संभव नहीं है। मौजूदा संख्या बल के आधार पर बसपा के पास अपनी राज्यसभा सीट बरकरार रखने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं।

10वीं सीट पर क्यों रहेगी नजर?

राज्यसभा चुनाव सिंगल ट्रांसफरेबल वोट और आनुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था से होता है। इसलिए सिर्फ कुल विधायकों की संख्या ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों की संख्या और वोटों का वितरण भी अहम होता है। मौजूदा आंकड़ों से सात सीटों पर NDA और दो पर सपा की स्थिति का गणित बनता है, जबकि दसवीं सीट के लिए अतिरिक्त वोटों का समीकरण महत्वपूर्ण होगा। लेकिन इसे किसी दल की निश्चित जीत के तौर पर नहीं देखा जा सकता, अंतिम परिणाम मतदान और मतगणना के बाद ही तय होगा।

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