Shahjahanpur News Update: क्रांतिकारियों की धरती शाहजहांपुर अब विकास की नई पहचान बन चुका है। मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय, गंगा एक्सप्रेस-वे, ओडीओपी से जरी-जरदोजी को नई उड़ान और औद्योगिक निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

उत्तर प्रदेश का शाहजहांपुर कभी उन क्रांतिकारियों की कर्मभूमि रहा है जिन्होंने ‘सरफरोशी की तमन्ना’ के साथ आज़ादी की लड़ाई में खुद को झोंक दिया। लेकिन विडंबना यह रही कि आज़ादी के बाद यह जिला लंबे समय तक उपेक्षा और ठहराव का प्रतीक बना रहा। उम्मीदें जगीं, फिर टूटीं। पर बीते कुछ वर्षों में तस्वीर बदली है। अब यही जिला शिक्षा, उद्योग, कारीगरी और इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर नई पहचान गढ़ता दिखाई दे रहा है। यह परिवर्तन एक दिन में नहीं आया। प्रशासनिक इच्छाशक्ति, योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय सहभागिता ने मिलकर शाहजहांपुर को विकास की नई धारा से जोड़ा है।

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शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम: कॉलेज से विश्वविद्यालय तक

जिले का प्रतिष्ठित स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज अब विश्वविद्यालय के रूप में विकसित होने जा रहा है। यह फैसला स्थानीय छात्रों के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। एमए की छात्रा निशा कहती हैं कि पहले उच्च शिक्षा के लिए बरेली या लखनऊ जाना मजबूरी थी। बाहर पढ़ाई का खर्च, सुरक्षा की चिंता और पारिवारिक दबाव, ये सभी चुनौतियां थीं। अब विश्वविद्यालय बनने से स्थानीय छात्रों को अपने ही शहर में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। राजनीति विज्ञान के छात्र उपेंद्र सिंह का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए यह निर्णय नई उम्मीद लेकर आया है। उनका मानना है कि उच्च शिक्षा की उपलब्धता सीधे तौर पर रोजगार के अवसरों को बढ़ाएगी।

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जरी-जरदोजी को मिला नया जीवन

शाहजहांपुर की जरी-जरदोजी कला कभी अपनी बारीक कढ़ाई के लिए जानी जाती थी, लेकिन बाजार और संसाधनों की कमी के कारण यह हस्तशिल्प लगभग विलुप्ति की कगार पर पहुंच गया था। राज्य सरकार की एक जिला एक उत्पाद योजना (ओडीओपी) के तहत इस कला को पुनर्जीवित करने का प्रयास हुआ।

कारीगर मोहम्मद यासीन खान बताते हैं कि कभी 4-5 कारीगरों के सहारे चलने वाला उनका काम अब 50 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है। देश के साथ-साथ दुबई और सऊदी अरब से भी ऑर्डर मिल रहे हैं। उनकी आय में सात से आठ गुना तक वृद्धि हुई है। आज कई कारीगर 25 से 30 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रहे हैं। स्थानीय अर्थव्यवस्था में यह बदलाव केवल आय बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पारंपरिक कला को सम्मान और नई पहचान भी मिली है।

पं. राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर मेडिकल कॉलेज

क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल की स्मृति में स्थापित मेडिकल कॉलेज ने जिले के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती दी है। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजेश कुमार के अनुसार, 100 बेड वाले अस्पताल और आधुनिक लैब सुविधाओं से अब गंभीर बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव हो गया है। पहले मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती थी। अब न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों के छात्र भी यहां से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं।

गंगा एक्सप्रेस-वे और औद्योगिक विकास

जिले को नई रफ्तार देने में गंगा एक्सप्रेस-वे की अहम भूमिका मानी जा रही है। यह एक्सप्रेस-वे शाहजहांपुर को प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों से सीधे जोड़ रहा है। परिवहन सुगमता बढ़ने से निवेश और व्यापार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। औद्योगिक क्षेत्र में UltraTech Cement की फैक्ट्री, चीनी मिल और अन्य इकाइयों ने हजारों युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है। औद्योगिक गलियारे के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को स्थायित्व मिला है।

महिलाओं और ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत कई महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई किट उपलब्ध कराए गए हैं। लाभार्थी सुनीता पांडे बताती हैं कि इस योजना से वह आत्मनिर्भर बनी हैं और परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। इसके अलावा ‘ड्रोन दीदी’ पहल के तहत महिलाएं कृषि क्षेत्र में उर्वरक छिड़काव कर आय अर्जित कर रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव दिख रहा है।

कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सक्रियता

जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, कानून व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। जनसुनवाई तंत्र को सक्रिय बनाया गया है, जिससे शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा की भावना बढ़ने से व्यापार और शिक्षा, दोनों क्षेत्रों में विश्वास मजबूत हुआ है। गन्ना और आलू किसानों की समस्याओं को लेकर भी प्रशासन सक्रिय बताया जा रहा है। भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर दिया गया है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।

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