US-ईरान सीज़फ़ायर: पाकिस्तान नहीं, चीन निकला असली मास्टरमाइंड-10 घंटे में कैसे पलटा खेल?
US-ईरान सीज़फ़ायर में असली खिलाड़ी पाकिस्तान नहीं बल्कि चीन था। लास्ट घंटे की गुप्त कूटनीति ने ईरान को राज़ी किया। अमेरिका ने पाकिस्तान को श्रेय दिया, लेकिन होर्मुज़ और ग्लोबल तेल संकट में चीन का दबदबा साफ दिखा। क्या पाकिस्तान सिर्फ़ चेहरा था?

China or Pakistan? US-Iran Ceasefire: US और ईरान के बीच हाल ही में हुए सीज़फ़ायर के पीछे की सच्चाई सबको चौंका सकती है। आम तौर पर माना गया कि पाकिस्तान ने मध्यस्थता कर इस संघर्ष को रोका, लेकिन असली खिलाड़ी चीन था। अंतिम घंटे की गुप्त कूटनीति ने ईरान को दो हफ़्तों के सीज़फ़ायर के लिए राज़ी कर दिया।
अमेरिका की धमकी और अचानक समझौता: 10 घंटे में बदला खेल
US और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अचानक दो हफ़्ते का सीज़फ़ायर लागू हुआ। US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी कि “अगर सीज़फ़ायर नहीं हुआ, तो सभ्यता खतरे में है।” 10 घंटे बाद ही समझौता हो गया और होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, फिर से खुल गया। हालांकि अमेरिका ने इस सफलता का श्रेय पाकिस्तान को दिया, लेकिन असली खिलाड़ी चीन था।
पाकिस्तान बनाम चीन: असली मध्यस्थ कौन?
US राष्ट्रपति ट्रंप ने आधिकारिक बयान में पाकिस्तान को ही मध्यस्थ बताकर चीन की भूमिका छिपा दी। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की “ड्राफ़्ट” पोस्ट ने भी सवाल खड़े किए कि असली संदेश किसी बाहरी ताकत यानी अमेरिका ने तैयार किया था। विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान ने अमेरिका का संदेश वाहक के तौर पर काम किया, लेकिन असली दबाव और निर्णायक कदम चीन ने उठाया।
चीन की गुप्त रणनीति
एक महीने तक चले संघर्ष में चीन, जो ईरान का मुख्य सहयोगी है, शांत दिख रहा था। पाकिस्तान ने बीजिंग से मदद मांगी, जिससे चीन को मध्यस्थ की भूमिका निभाने का मौका मिला। चीन ने आखिरी मिनट में सीधे ईरान से बातचीत की और सीज़फ़ायर को पक्का किया। इसके अलावा, चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में उस प्रस्ताव को रोक दिया जो स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देता था।
चीन को क्या फ़ायदा?
चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है। अगर युद्ध बढ़ता, तो ईरानी तेल निर्यात पूरी तरह रुक सकता था और चीन की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। चीन ने अपने पुराने जहाज़ (‘शैडो फ़्लीट्स’) और विशाल तेल भंडार का इस्तेमाल कर तेल संकट से बचाव किया। इसके साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था और चीन के निर्यात को भी स्थिर रखने में मदद मिली।
भविष्य और कूटनीतिक संकेत
चीन ने अपने दबाव को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया, लेकिन विदेश मंत्री वांग यी ने लगातार ईरान, इज़राइल, रूस और खाड़ी देशों के साथ 26 बार बातचीत की। इस रणनीति से चीन मध्य-पूर्व में सीधे युद्ध में शामिल होने से बचा और अपनी ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की। अब सवाल यह है कि भविष्य में अमेरिका और चीन के रिश्तों में यह रणनीति किस तरह का असर डालेगी, खासकर जब ट्रंप अगले महीने शी जिनपिंग से बीजिंग में मिलेंगे।
पाकिस्तान की पोस्ट और उठते सवाल
सीज़फ़ायर के ऐलान से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने X पर एक पोस्ट की जिसमें ट्रंप से फ़ौजी कार्रवाई की समय सीमा बढ़ाने की गुज़ारिश थी। पोस्ट का प्रारंभिक वर्शन “ड्राफ़्ट - X पर पाकिस्तान के PM का संदेश” था, जिससे कई जानकारों ने शक किया कि इसे किसी बाहरी शक्ति ने लिखा हो।
अमेरिका, चीन और मध्य-पूर्व की राजनीति
ट्रंप ने पाकिस्तान को श्रेय दिया और चीन का ज़िक्र नहीं किया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रणनीति थी ताकि चीन की भूमिका अमेरिकी कमजोरी के रूप में सामने न आए। लेकिन चीन ने संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रोककर स्पष्ट कर दिया कि वह ईरान के पक्ष में है। अंततः, चीन की गुप्त कूटनीति ने ही सीज़फ़ायर तय किया।
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