वडोदरा के एक शांत रिहायशी फ़्लैट के पीछे चल रहा था एक घिनौना डिजिटल काला सच। लैपटॉप, वेबकैम और क्रिप्टोकरेंसी के जाल में छिपे इस सीक्रेट साइबरसेक्स रैकेट का पर्दाफ़ाश होते ही सब सन्न रह गए! अब डिजिटल सबूतों से खुलेगा नेटवर्क का पूरा राज।
वडोदरा: गुजरात के वडोदरा शहर के एक शांत रिहायशी इलाके में चल रहे एक बड़े डिजिटल अपराध का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मंज़लपुर इलाके के प्रकृति फ़्लैट्स में चल रहे एक गुप्त ऑनलाइन अश्लीलता और साइबरसेक्स रैकेट का पर्दाफ़ाश करते हुए पुलिस ने मुख्य सूत्रधार को रंगे हाथों गिरफ़्तार कर लिया। 10वीं पास एक व्यक्ति किस तरह आधुनिक तकनीक, क्रिप्टोकरेंसी और विदेशी ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स का इस्तेमाल करके इस अवैध नेटवर्क को चला रहा था, यह जानकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।
मुखबिर की पक्की सूचना और फ़्लैट पर अचानक छापेमारी
मामले की शुरुआत तब हुई जब मंज़लपुर पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि दरबार चौकड़ी के पास प्रकृति फ़्लैट्स के F/304 नंबर फ़्लैट में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। जानकारी के अनुसार, वहाँ बाहर से महिलाओं को लाकर उनसे ऑनलाइन ग्राहकों के साथ अश्लील बातचीत और हरकतें करवाई जा रही थीं। पुलिस टीम ने स्वतंत्र गवाहों के साथ फ़्लैट की घेराबंदी की और अचानक छापा मारा। दरवाज़ा एक महिला ने खोला और जब पुलिस अंदर पहुँची, तो वहाँ का नज़ारा देखकर सारा माजरा साफ़ हो गया। कमरे में हाई-स्पीड इंटरनेट, लैपटॉप और कैमरों का एक पूरा सेटअप तैयार था।
स्ट्रिपचैट, डिजिटल टोकन और क्रिप्टोकरेंसी का खतरनाक खेल
पुलिस की पूछताछ में फ़्लैट से काम कर रही महिला ने इस रैकेट के संचालन का पूरा सच उगल दिया। आरोपी मनीष कानूभाई पधियार ने महिलाओं को काम पर रखा था और उन्हें स्ट्रिपचैट (Stripchat) नाम के विदेशी प्लेटफ़ॉर्म पर लॉग इन करने के लिए यूज़र आईडी और पासवर्ड दिए थे। ऑनलाइन आने वाले ग्राहक अपनी मनपसंद सेवाओं के लिए डिजिटल 'टोकन' खरीदते थे।
इन टोकन की कमाई का हिसाब-किताब बेहद चौंकाने वाला था:
- एक टोकन की कीमत लगभग 4 रुपये तय की गई थी।
- कमाए गए टोकन को सीधे बैंक खातों के बजाय क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी एक एप्लिकेशन के माध्यम से पैसे में बदला जाता था।
- सारा भुगतान पधियार के मुख्य पेमेंट अकाउंट से जुड़ा था, जहां से वह अपना मोटा कमीशन काटने के बाद बाकी पैसे महिलाओं के खातों में ट्रांसफर कर देता था।
महिलाओं को कैसे काम पर लगाया जाता था?
FIR में दर्ज आरोपों के अनुसार, फ्लैट से काम करने वाली महिलाओं को लैपटॉप और कैमरे उपलब्ध कराए गए थे। वे कथित तौर पर Stripchat अकाउंट के जरिए ग्राहकों से ऑनलाइन जुड़ती थीं। पुलिस के मुताबिक, ग्राहक प्लेटफॉर्म पर टोकन खरीदकर भुगतान करते थे। इन टोकन को बाद में कथित तौर पर पैसे में बदला जाता था। पुलिस का आरोप है कि भुगतान से जुड़ी जानकारी आरोपी से जुड़ी थी और रकम उसके बैंक अकाउंट तक पहुंचती थी। इसके बाद वह कथित तौर पर अपना कमीशन काटकर बाकी पैसा महिलाओं को देता था।
छापे के दौरान आरोपी भी पहुंचा, फिर क्या हुआ?
पुलिस के अनुसार, आरोपी मनीष कानूभाई पधियार छापेमारी के दौरान फ्लैट पर पहुंचा। FIR में दावा किया गया है कि पूछताछ के दौरान उसने महिलाओं को ऑनलाइन गतिविधियों के लिए काम पर रखने और फ्लैट की व्यवस्था करने की बात स्वीकार की। पुलिस का कहना है कि उसने इस काम के लिए लैपटॉप खरीदने की बात भी बताई। पुलिस के मुताबिक, इस कथित ऑपरेशन में चार महिलाओं को काम पर रखा गया था, जबकि आरोपी ने तीन महिलाओं के उस समय लैपटॉप इस्तेमाल करने की बात कही।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जखीरा ज़ब्त और कड़े कानूनी शिकंजे में आरोपी
छापेमारी के दौरान ही मुख्य आरोपी मनीष पधियार भी फ़्लैट पर पहुंच गया, जिसे पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया। पुलिस ने मौके से तीन लैपटॉप, केबल वाले दो कैमरे, एक iPhone 15 और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान ज़ब्त किए हैं। वडोदरा F डिवीज़न के ACP विमल पी. गमित ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 और सूचना प्रौद्योगिकी (IT Act) की धारा 67 व 67A के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब ज़ब्त किए गए उपकरणों और डिजिटल बैंक ट्रांज़ैक्शन की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और क्या इसके पीछे ब्लैकमेलिंग या धोखाधड़ी जैसा कोई और बड़ा सिंडिकेट शामिल है।


