Assi Ghat Varanasi: वाराणसी के Assi Ghat पर गंगा का पानी घटने के बाद बड़े पैमाने पर गाद की परतें उभर आईं। तट की रूपरेखा बदली दिखी और सीढ़ियों के आगे तलछट फैलने से सतह पर महीन मिट्टी-रेत की तह नजर आई।

Ganga Water Level Today: गंगा नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट की तस्वीर भी बदल गई है। पानी पीछे हटने के बाद घाट के निचले हिस्से में जमा तलछट और गाद की मोटी परतें साफ दिखाई देने लगी हैं। सीढ़ियों के आगे तक फैली महीन मिट्टी और रेत ने घाट के किनारे की सतह को पूरी तरह नया रूप दे दिया है।

जहां कुछ समय पहले तक पानी का फैलाव नजर आ रहा था, वहां अब गंगा के साथ बहकर आई मिट्टी और महीन रेत की परतें दिखाई दे रही हैं। कई हिस्सों में तलछट जमा होने के कारण घाट का निचला भाग समतल नजर आ रहा है। सतह पर कहीं सूखी मिट्टी की परत दिख रही है तो कहीं पानी से धुली हुई गाद अब भी नजर आती है।

पानी घटा तो सामने आई गाद की मोटी परत

अस्सी घाट पर सबसे स्पष्ट बदलाव घाट की सीढ़ियों के आगे दिखाई दे रहा है। जलस्तर कम होने के बाद उन हिस्सों का बड़ा भाग खुल गया है, जो पहले पानी में डूबा हुआ था। इन जगहों पर गंगा के प्रवाह के साथ आई तलछट जमा हो गई है।

महीन रेत और मिट्टी की कई परतों ने कुछ स्थानों पर पत्थरों और घाट की मूल सतह को ढक दिया है। पैदल चलने पर कई हिस्सों में सूखी मिट्टी और महीन धूल भी उठती दिखाई देती है। किनारे पर बनी रेत-मिट्टी की लकीरें यह भी दिखाती हैं कि पानी हाल में ही इन हिस्सों से पीछे हटा है।

घाट के पुराने हिस्सों की बदली तस्वीर

जलस्तर घटने के बाद सीढ़ियों के निचले हिस्से और किनारे का स्वरूप भी बदला हुआ नजर आ रहा है। पानी में डूबे रहने वाले पत्थरों के हिस्से अब खुले हैं, जबकि उनके आसपास जमा तलछट ने घाट की सतह को ढक दिया है।

सीढ़ियों के किनारों और सिरों पर दिखाई देने वाली मिट्टी की परतें पानी के घटते स्तर की प्रक्रिया को साफ तौर पर दर्शाती हैं। इस वजह से घाट का वह हिस्सा, जो आमतौर पर पानी और गतिविधियों से भरा रहता है, फिलहाल काफी अलग दिखाई दे रहा है।

नदी के बहाव के साथ जमा होती है तलछट

नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के दौरान तलछट का किनारे पर जमा होना प्राकृतिक प्रक्रिया है। बहते पानी के साथ मिट्टी और रेत के महीन कण आगे बढ़ते हैं और बहाव कम होने पर किनारे या नदी के तल में ठहरने लगते हैं।

पानी पीछे हटने के बाद यही जमा सामग्री खुली सतह पर दिखाई देने लगती है। इसके सूखने के साथ अलग-अलग परतें और निशान भी उभर आते हैं। अस्सी घाट पर इस समय दिखाई दे रहा दृश्य भी इसी प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

फिलहाल गंगा का पानी पीछे हटने के बाद घाट का निचला हिस्सा एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। सीढ़ियों से आगे तक फैली गाद और रेत ने अस्सी घाट के किनारे की बनावट को अस्थायी रूप से बदल दिया है। आने वाले दिनों में जलस्तर और नदी के बहाव में बदलाव के साथ इस सतह का स्वरूप भी बदल सकता है।