डोकलाम के पास अचानक तेज हुई रेलवे परियोजना ने हलचल बढ़ा दी है। 380 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण को मंजूरी मिलते ही भारत-चीन-भूटान सीमा तक रणनीतिक कनेक्टिविटी को लेकर नए संकेत मिलने लगे हैं।
कोलकाता: भारत-चीन-भूटान ट्राई-जंक्शन के पास रणनीतिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने चालसा-नक्साक नई रेलवे लाइन परियोजना के लिए करीब 380 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज़ करने की मंजूरी दे दी है। करीब 20 किलोमीटर लंबी यह परियोजना वर्षों से अटकी हुई थी, लेकिन अब इसके दोबारा रफ्तार पकड़ने से सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच और रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
6 साल बाद खुला रास्ता, अब क्यों बढ़ी तेजी?
यह रेलवे लाइन न्यू जलपाईगुड़ी-सिलीगुड़ी-न्यू बोंगाईगांव गेज कन्वर्ज़न परियोजना का अहम हिस्सा है। परियोजना को 2011-12 में मंजूरी मिली थी, लेकिन 2019 में भूमि और प्रशासनिक सहयोग के अभाव में काम ठप पड़ गया। इस साल जनवरी में रेलवे ने इसे फिर से शुरू किया, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाओं में तेजी लाई जा रही है। इससे लंबे समय से रुकी परियोजना के जल्द आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।
- समीक्षा बैठक और गति: केंद्र और राज्य के बीच हालिया उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सभी लंबित रणनीतिक प्रोजेक्ट्स को एक साथ मंज़ूरी दे दी गई।
- रेल मंत्री का दौरा: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के बंगाल दौरे के दौरान इस परियोजना की समीक्षा की गई और ज़मीन अधिग्रहण की बाधाओं को दूर करने का फैसला लिया गया।
ये भी पढ़ें… क्या बिना इंश्योरेंस अब नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल? सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश का असर
डोकलाम के करीब रणनीतिक कनेक्टिविटी होगी मजबूत
सिलीगुड़ी के सांसद राजू बिस्टा के अनुसार, रेल मंत्रालय ने जलढाका तक 17 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के लिए लगभग 272 करोड़ रुपये भी मंजूर किए हैं। प्रस्तावित रूट चालसा के पास खुनिया मोड़ से शुरू होकर जलपाईगुड़ी और कलिम्पोंग वन क्षेत्रों से गुजरेगा। यह रेल संपर्क जलढाका क्षेत्र को जोड़ेगा, जो डोकलाम ट्राई-जंक्शन के बेहद करीब स्थित है। माना जा रहा है कि इससे सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच आसान होगी और सामरिक दृष्टि से भारत की स्थिति और मजबूत होगी। मानसून के ठीक बाद भारतीय रेलवे और पश्चिम बंगाल वन विभाग इस प्रस्तावित रेल लाइन के लिए एक संयुक्त सर्वे शुरू करेंगे। जलढाका नदी का यह इलाका भारत, भूटान और चीन (डोकलाम) के ट्राई-जंक्शन के बिल्कुल करीब स्थित है।
सिर्फ सुरक्षा नहीं, पर्यटन और विकास को भी मिलेगा बढ़ावा
नई रेल लाइन का लाभ केवल रणनीतिक मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा। जलढाका, बिंदु और टोडे तांगटा जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय पर्यटन और व्यापार को भी नई गति मिलने की संभावना है। रेलवे और पश्चिम बंगाल वन विभाग मानसून के बाद संयुक्त सर्वे करेंगे, जिसके बाद निर्माण कार्य में और तेजी आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पूर्वोत्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
ये भी पढ़ें… ICMAI CMA जून 2026 रिजल्ट जारी: इंटर-फाइनल के नतीजे घोषित, जानें टॉपर्स और चेक करने का तरीका


