US Midterm Election 2026: अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन सीनेट चुनाव में जीत दर्ज कर इतिहास रचा। वह अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बने, जीत के बाद कॉरपोरेट कंपनियों पर साधा निशाना।

Who is Abdul El-Sayed: अमेरिका के मिशिगन में सीनेट चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर जीत दर्ज की है। कड़े मुकाबले में मिली इस जीत के बाद अब्दुल ने अपने भाषण में अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की व्यवस्था पर कॉरपोरेट कंपनियों और अरबपतियों का प्रभाव बढ़ गया है। अब समय आ गया है कि उनके खास हितों को चुनौती दी जाए।

टैक्स का पैसा दूसरों पर बम गिराने में खर्च न हो-अब्दुल

  • अब्दुल ने कहा कि अमेरिका की ताकत अपनी कमियों को छिपाने में नहीं, बल्कि उन्हें स्वीकार करके सुधारने की हिम्मत दिखाने में है।
  • उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नागरिकों के टैक्स का पैसा उनके और उनके बच्चों के भविष्य पर खर्च होना चाहिए, न कि दूसरे देशों के बच्चों पर बम गिराने में।
  • जीत के बाद अपने संबोधन में अब्दुल ने कहा, “हमें फिर से महान बनने की जरूरत नहीं है। हमें उस चीज को अपनाने की जरूरत है, जिसने हमेशा हमें महान बनाया है। यानी खुद को बेहतर बनाने की इच्छाशक्ति।”
  • उन्होंने आगे कहा कि आज इसका मतलब उन कॉरपोरेट कंपनियों और अरबपतियों के विशेष हितों को चुनौती देना है, जिन्होंने अमेरिकी व्यवस्था को अपने पक्ष में कर लिया है। उनके मुताबिक, अमेरिका की असली महानता अपनी कमियों को नजरअंदाज करने में नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने की हिम्मत दिखाने में है।
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अब्दुल ने अमेरिकी व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई

  • अब्दुल अल-सैयद ने अपने भाषण में मिशिगन के आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर देश में लोगों के लिए बुनियादी जरूरतें पूरी करना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए।
  • उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को राशन का दूसरा बैग खरीदने, अपनी गाड़ी में पेट्रोल भरवाने, घर खरीदने और डॉक्टर से इलाज कराने के लिए इतनी मुश्किलों का सामना नहीं करना चाहिए।
  • उनके इस बयान को अमेरिकी सरकार की खर्च नीतियों और विदेशों में सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाने के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि अमेरिकी नागरिकों के पैसे का इस्तेमाल उनकी जरूरतों और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए होना चाहिए।

अब्दुल बने अमेरिकी सीनेट के पहले मुस्लिम मेंबर

  • अब्दुल अल-सैयद की जीत को अमेरिकी राजनीति में ऐतिहासिक माना जा रहा है। वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम हैं। मिस्र-अमेरिकी मूल के अब्दुल पेशे से डॉक्टर हैं।
  • हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके मुस्लिम होने के कारण उन पर लगातार इस्लामोफोबिक हमले किए गए। इसके बावजूद उन्होंने अपना चुनाव प्रचार जारी रखा और कड़े मुकाबले में जीत हासिल की।
  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कई बार अब्दुल अल-सैयद को निशाना बनाया था। ट्रंप ने उन्हें 'जिहादी' तक कहा था।
  • मिशिगन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने उन पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि अब्दुल सीनेट में जाने से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरने वाले इकलौते सीनेटर होंगे।

अपनी ही पार्टी के भीतर से मिला विरोध

  • अब्दुल अल-सैयद को चुनाव के दौरान केवल रिपब्लिकन पार्टी ही नहीं, बल्कि अपनी डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर से भी विरोध का सामना करना पड़ा।
  • अगस्त में मिशिगन के डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी चुनाव में अब्दुल ने हेली स्टीवंस को हराया था। हालांकि, इस हार के बाद हेली स्टीवंस ने पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल का समर्थन करने के बजाय रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का समर्थन किया।
  • पार्टी के भीतर इस विरोध और चुनाव प्रचार के दौरान हुए इस्लामोफोबिक हमलों के बावजूद अब्दुल अल-सैयद ने हार नहीं मानी। उन्होंने माइक रोजर्स के खिलाफ कड़े मुकाबले में जीत हासिल की।
  • उनकी इस जीत को अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। साथ ही, जीत के बाद कॉरपोरेट कंपनियों, अरबपतियों और अमेरिकी टैक्स के इस्तेमाल को लेकर दिए गए उनके बयानों ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।