अबर कवास ने न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट का डिस्ट्रिक्ट-12 चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया। वह न्यूयॉर्क की विधायिका में पहुंचने वाली पहली फिलिस्तीनी-अमेरिकी महिला हैं। जानिए कौन हैं कवास, उनका परिवार, 9/11 के बाद के संघर्ष, पिता के डिपोर्टेशन, राजनीतिक सफर, सामाजिक न्याय और चुनावी मुद्दे।

US Midterm Shock: अमेरिका के राजनीतिक नक्शे पर एक नया इतिहास दर्ज हुआ है। ब्रुकलिन की गलियों में पली-बढ़ीं और 15 साल से जमीनी सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहीं अबेर कवास ने न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट का चुनाव जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। फिलिस्तीनी प्रवासियों की बेटी अबेर कवास स्टेट सीनेट पहुंचने वाली पहली फिलिस्तीनी-अमेरिकी नेता बन गई हैं। 'डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका' (DSA) से जुड़ीं अबेर का यह सफर निजी संघर्षों, नागरिक अधिकारों और लगातार एक्टिविज्म की अनूठी कहानी है।

कौन हैं अबर कवास और कैसा रहा बचपन?

कवास का जन्म और पालन-पोषण ब्रुकलिन में हुआ। उनके माता-पिता फिलिस्तीनी मूल के हैं और 1990 के दशक में अमेरिका आए थे। अबेर का जीवन बचपन से ही भारी चुनौतियों से भरा रहा है।

  • निगरानी का डर: 9/11 के हमलों के बाद उनके समुदाय के मुस्लिम परिवारों पर लगातार निगरानी और देश से निकाले जाने का खौफ छाया रहता था।
  • पारिवारिक आर्थिक संकट: जब अबेर हाई स्कूल में थीं, तब उनके पिता को जॉर्डन डिपोर्ट कर दिया गया। पिता के जाने से परिवार पर आर्थिक संकट आ गया, जिसके बाद बच्चों को छोटी उम्र से ही काम में हाथ बंटाना पड़ा।
Scroll to load tweet…

फिलिस्तीनी अधिकारों से लेकर चुनावी राजनीति तक का सफर

अबेर कवास ने अपने करियर की शुरुआत सड़कों पर हक की आवाज उठाने से की थी।

  • विवादास्पद फंडिंग को चुनौती: 2023 में उन्होंने इज़राइली बस्तियों से जुड़े समूहों को दी जाने वाली फंडिंग पर रोक लगाने वाले 'नॉट ऑन अवर डाइम्स' (Not On Our Dime) बिल का समर्थन किया था।
  • सड़कों पर विरोध और गिरफ्तारी: बेंजामिन नेतन्याहू के न्यूयॉर्क दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन के लिए वे गिरफ्तार भी हुईं। इसके अलावा हाल ही में पुलिस विभाग के विवादास्पद निगरानी सौदे को रद्द कराने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। जून 2026 में उन्होंने डेमोक्रेटिक प्राइमरी जीतकर आम चुनाव का रास्ता साफ किया।

'गरिमा को फंड दें' और वामपंथी खेमे का समर्थन

अबेर का चुनाव प्रचार स्थानीय समस्याओं और विश्व शांति के संतुलन पर टिका था।

  • स्थानीय एजेंडा: उनके अभियान का मुख्य नारा था-"गरिमा को फंड दें, विनाश से लड़ें"। उन्होंने सस्ती हाउसिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, यूनिवर्सल हेल्थकेयर और प्रवासियों की सुरक्षा ('न्यूयॉर्क फॉर ऑल एक्ट') को प्राथमिकता दी।

क्या हैं अबर कवास के चुनावी मुद्दे?

उनके चुनाव प्रचार में किफायती आवास, यूनिवर्सल हेल्थकेयर, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, प्रवासी अधिकार और जलवायु परिवर्तन प्रमुख मुद्दे रहे। उन्होंने युद्ध के लिए अमेरिकी फंडिंग का विरोध किया और स्थानीय एजेंसियों को संघीय आव्रजन कार्रवाई में सहयोग से रोकने वाले कानून का समर्थन किया।

ममदानी और बर्नी सैंडर्स का मिला समर्थन

कवास को जोहरान ममदानी, सीनेटर बर्नी सैंडर्स और कांग्रेस सदस्य रशीदा तलीब का समर्थन मिला। नेतन्याहू के न्यूयॉर्क दौरे के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था, हालांकि बाद में रिहा कर दिया गया। अब उनकी जीत से न्यूयॉर्क की राजनीति में फिलिस्तीनी-अमेरिकी प्रतिनिधित्व को नई पहचान मिली है।