Sunil Bansal Indore: सुनील बंसल कौन हैं, जो 34वीं बार अस्थियां लेकर हरिद्वार जाएंगे? जानिए 18 पुरुषों, 6 महिलाओं और 11 बंदरों के अस्थि विसर्जन, पिंड दान, तपर्ण और पितृ पक्ष से जुड़ी पूरी कहानी।

Who is Sunil Bansal: इंदौर में एक सामाजिक पहल के तहत 35 साल से जारी सेवा का सिलसिला इस बार भी आगे बढ़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता और पार्षद सुनील बंसल शनिवार को 18 पुरुषों, छह महिलाओं और 11 बंदरों की अस्थियां लेकर हरिद्वार जाएंगे। यहां गंगा में विधि-विधान से अस्थि विसर्जन कराया जाएगा। जानिए कौन हैं इंदौर के सुनील बंसल और पितृ पक्ष में क्यों करते हैं अनजान लोगों का अस्थि विसर्जन, पिंडदान और तर्पण।

कौन हैं सुनील बंसल?

सुनील बंसल इंदौर से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता और पार्षद हैं। वे लंबे समय से जरूरतमंद लोगों की मदद और सामाजिक सेवा से जुड़े काम कर रहे हैं। अस्थि विसर्जन की यह पहल उनकी प्रमुख सेवाओं में शामिल है, जिसे वे पिछले 33 वर्षों से पितृ पक्ष के दौरान जारी रखे हुए हैं। इसके अलावा वे गांधी स्क्वायर में ‘सेवा बैंक’ के जरिए रोजाना 150 से ज्यादा जरूरतमंद लोगों के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था भी करते हैं। इन सेवा कार्यों में उनका परिवार भी सहयोग करता है।

33 साल से जारी है सेवा, अब 34वें साल की तैयारी

सुनील बंसल पिछले 33 वर्षों से पितृ पक्ष के दौरान उन परिवारों की अस्थियां हरिद्वार पहुंचाने का काम कर रहे हैं, जो आर्थिक या दूसरी वजहों से खुद वहां नहीं जा पाते। इस बार भी वे अपने खर्च पर यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बंसल के मुताबिक, उन्होंने इस सेवा की शुरुआत अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों की अस्थियां हरिद्वार ले जाने से की थी। इसके बाद उन्होंने दूसरे जरूरतमंद परिवारों की मदद करने का फैसला किया। अब तक वे 1,800 से ज्यादा दिवंगत लोगों की अस्थियों का विसर्जन करा चुके हैं।

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परिवार घर से सौंप सकेंगे अस्थियां

जिन परिवारों के लिए हरिद्वार जाकर अस्थि विसर्जन कराना संभव नहीं है, वे अपनी अस्थियां गणपति चौक स्थित बंसल इंस्टीट्यूट में जमा करा सकते हैं। फोटो जर्नलिस्ट शंभू सेन राठौड़ के अनुसार, इस पहल का मकसद ऐसे परिवारों को सुविधा देना है, जिन्हें आर्थिक या अन्य परिस्थितियों के कारण यह यात्रा करना मुश्किल पड़ती है। शनिवार को रवाना होने से पहले अस्थि कलशों की पूजा की जाएगी। इसके बाद हरिद्वार में पंडित प्रदीप झा की ओर से पिंडदान और तर्पण कराया जाएगा और फिर गंगा में अस्थि विसर्जन होगा। बंसल के साथ इस बार 15 सहयोगी भी रहेंगे।

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सिर्फ अस्थि विसर्जन नहीं, भोजन सेवा भी

सुनील बंसल गांधी स्क्वायर में 'सेवा बैंक' भी चलाते हैं। उनके मुताबिक, यहां रोजाना 150 से अधिक जरूरतमंद लोगों को निशुल्क भोजन कराया जाता है। इस काम में उनकी पत्नी, बेटे शलभ बंसल और बेटी भी सहयोग करते हैं। इस पहल की खास बात यह है कि अस्थि विसर्जन जैसी धार्मिक जरूरत को सेवा के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि जिन परिवारों के लिए हरिद्वार जाना मुश्किल है, वे भी अपने दिवंगत परिजनों के अंतिम संस्कार से जुड़ी परंपराएं पूरी कर सकें।