पाली जिले की भाखर क्षेत्र की ग्राम पंचायत पाबा की रतोरा फली में गुरुवार को एक 75 वर्षीय बुजुर्ग को पेंशन दिलाने के लिए उसके परिजन 3 किलोमीटर तक पहाड़ी रास्ते ऊंचाई तक ले गए। 

पाली. फोन में नेटवर्क नहीं हो तो हर आदमी की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है किसी नेटवर्क कनेक्टिविटी के कारण किसी बुजुर्ग को उसके परिजन 3 किमी तक पहाड़ी में ले जाएं। दरअसल, राजस्थान के पाली जिले के आदिवासी बाहुल्य आबूरोड तहसील में नेटवर्क कनेक्टिविटी के कारण लोगों को समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यहां लोगों को कई तरह मुश्किलों से गुजरना पड़ता है। यहां भाखर क्षेत्र के 24 गांवों में राशन और पेंशन के लिए आदिवासियों को नेटवर्क के लिए कई किमी तक चलना पड़ता है। लेकिन जो चल नहीं पाते हैं उनके लिए उनके परिजन कई तरह के तरीके अपनाते हैं। 

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दरअसल, पाली जिले की भाखर क्षेत्र की ग्राम पंचायत पाबा की रतोरा फली में गुरुवार को एक 75 वर्षीय बुजुर्ग को पेंशन दिलाने के लिए उसके परिजन 3 किलोमीटर तक पहाड़ी रास्ते ऊंचाई तक ले गए। रतोराफली निवासी वृद्धा मोतली की पत्नी भाणा गरासिया को वृद्धावस्था पेंशन दिलाने के लिए उन्हें उनके परिजन 3 किमी पहाड़ी पर लेकर गए। उनके साथ डाकिया बी था जहां उसने अंगूठा लगवाकर उसे पेंशन दी। पहाड़ी का रास्ता काफी दुर्गम है। ऐसे में परिजन बुजुर्ग महिला को चारपाई पर लेटा कर 3 किमी दूर पहाड़ी पर ले गए। जहां नेटवर्क आने पर आधार इनेबल पेमेंट सिस्टम से अंगूठा लगाकर वृद्धा को पेंशन दी गई।

नेटवर्क की तलाश की
जब बुजुर्ग महिला को लेकर पहाड़ी पहुंचे तो वहां भी नेटवर्क नहीं था। जिस पर परिजन वृद्धा को चारपाई पर लिटा नेटवर्क की तलाश में निकल पड़े। जब नेटवर्क मिला तब महिला को उसकी पेंशन दिलाई गई। 3 किलोमीटर तक सफर तय करने के बाद आखिरकार एक जगह नेटवर्क मिल गया। परिजनों ने चारपाई को पहाड़ी पर रख दिया। डाकिए ने पेंशन के 750 रुपए का भुगतान किया।