राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष के नामांकन प्रक्रिया को पूरा करने के बाद वापस जयपुर लौटे। कल से अलग-अलग जिलों में संपर्क का कार्यक्रम।  इसके साथ ही नेक्स्ट वीक दिल्ली से आ रही सुपरवाइजर की टीम। उनके आने से पहले चेतावनी जारी न हो किसी तरह की अनुशासन हीनता।

जयपुर. राजस्थान में राजनीतिक उठापटक के बाद ऐसा कुछ हुआ जिसका अंदाजा कोई नहीं लगा पा रहा था । राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम लगभग तय माना जा रहा था लेकिन अचानक परिस्थितियां बदली, हालात बदले और वे दौड़ से ही बाहर हो गए। हालांकि उन्होंने शुक्रवार के दिन दिल्ली में नामांकन प्रक्रिया के दौरान अपनी मौजूदगी रखी और जब प्रक्रिया पूरी हो गई तो वे शाम को वापस जयपुर लौट आए। वहां से आने के बाद अब अलग-अलग जिलों में जाकर नेताओं से मिलने का कार्यक्रम रखा गया है। कल यानि शनिवार के दिन बीकानेर का दौरा है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार की रात में चुनिंदा विधायकों से मिल सकते हैं। हालांकि पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट फिलहाल दिल्ली में ही है। उनका लौटने का कार्यक्रम अभी तय नहीं है।

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अगले सप्ताह तक आ सकते हैं पर्यवेक्षक
राजस्थान में अब फिर से विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी । इसके लिए दिल्ली से फिर से पर्यवेक्षक आएंगे । लेकिन अब पर्यवेक्षक दूसरे होंगे । पर्यवेक्षकों के आने से पहले ही ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी यानी एआईसीसी में पत्र जारी कर सभी विधायकों और नेताओं को यह चेतावनी दे दी है कि किसी भी तरह की अनुशासनहीनता अब पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी। 

रोचक होगा दोनो दलों की साथ में बैठक
अब यह देखना रोचक होगा कि गहलोत खेमे के विधायक और पायलट खेमे के विधायक एक साथ एक ही जगह पर बैठेंगे और उसके बाद उनसे दिल्ली से आने वाले पर्यवेक्षक संवाद करेंगे। इस संवाद की रिपोर्ट बनाकर लिखित में कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी को दी जाएगी और उसके बाद सोनिया गांधी किसी भी तरह का फैसला लेंगी। हालांकि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि इस बार दिल्ली से कौन और कितने पर्यवेक्षक आ रहे हैं।

नहीं बदेलगा प्रदेश सीएम का चेहरा
हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में यह बताया जा रहा है कि अब राजस्थान में मुख्यमंत्री नहीं बदला जाएगा। लेकिन उसके बाद भी पार्टी चाहती है कि आलाकमान के फैसले से कोई नाराज ना हो। अब पर्यवेक्षकों की जो बैठक होने वाली है उसमें सबसे बड़ा मुद्दा यही रहने वाला है कि दोनों पक्षों को एक ही छत के नीचे एक साथ मिल बैठकर काम करने के टास्क दिए जाएं और साल 2023 में आने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर उन्हें तैयारी करने के लिए कहे।

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