राजस्थान में चलने वाली चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना के तहत एक सफल इलाज किया गया है। जिसमें पत्नी ने अपने लीवर का एक हिस्सा देकर बचाई पति की जान। इलाज में लगने थे 12 लाख रुपए पर सिर्फ 2 लाख में हुआ पूरा इलाज।

जयपुर. राजस्थान में कुछ समय पहले शुरू की गई मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति हुई है। स्वास्थ्य योजना के तहत जयपुर शहर में एक ऐसा ऑपरेशन किया गया है जिसे करने में लाखों रुपए लगना मामूली बात थी , लेकिन चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना के तहत इस ऑपरेशन को किया गया और अच्छी बात यह रही कि यह ऑपरेशन सफल रहा। चिकित्सकों ने बीमार दंपत्ति की 1 महीने तक मॉनिटरिंग की और उसके बाद उन्हें कुछ दिन पहले घर भेज दिया। प्रदेश में चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना के तहत किया गया यह पहला लिवर ट्रांसप्लांट है। इस लिवर ट्रांसप्लांट के बाद अब राज्य में अन्य मरीजों की राह भी आसान हो सकेगी। जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में यह ऑपरेशन किया गया है। इसके बारे में आज महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टर्स ने जानकारी दी है।

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25 जून को किया गया था ऑपरेशन 1 महीने तक की देखरेख

दरअसल जयपुर के सीतापुर क्षेत्र में स्थित महात्मा गांधी अस्पताल में 25 जून को यह सर्जरी की गई थी । लीवर फेलियर की स्थिति से जूझ रहे रोगी मुकेश कुमार का यह ऑपरेशन किया गया था । 25 जून को ऑपरेशन करने से पहले मुकेश के परिवार को इस बारे में समझाया गया था और उसके बाद उसकी पत्नी के लिवर की जांच पड़ताल कर लीवर का एक हिस्सा मुकेश के लिवर में लगाया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 6 से भी ज्यादा डॉक्टर्स की टीम मौजूद रही। साथ ही मेडिकल स्टाफ भी सर्जरी में जुटा रहा। कुछ घंटे की सर्जरी के बाद पति और पत्नी दोनों को अस्पताल के वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया । वार्ड में शिफ्ट करने के बाद करीब 4 हफ्ते तक दोनों के ऊपर निगरानी की गई । डॉक्टर्स की टीम हर दिन दोनों का मेडिकल बुलेटिन तैयार करती और उसे सीनियर्स तक पहुंचाती। एक महीने के अथक प्रयास के बाद आखिर दंपत्ति खतरे से बाहर आ गए। उसके बाद दोनों को छुट्टी दे दी गई। इस पूरी सर्जरी के बारे में अस्पताल के ही पेटालॉजिस्ट डॉक्टर करण कुमार ने बताया कि सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन पूरी कर ली गई। लीवर का एक हिस्सा उसकी पत्नी ने डोनेट किया और उसे बचा लिया गया। 

महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज एवं टेक्नोलॉजी जयपुर के चेयरपर्सन डॉ विकास स्वर्णकार ने बताया कि राजस्थान में बड़ी संख्या में लीवर फेलियर के रोगी है। जिन्हें लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत है। इनमें से बहुत से लोग लाखों रुपयों का खर्चा नहीं उठा सकते। ऐसी स्थिति में सरकार की चिरंजीवी योजना काम आ सकती है। स्वर्णकार ने बताया कि ऑपरेशन को सफल बनाने वाली टीम में डॉ अजय शर्मा, डॉक्टर आरबी चौबे, डॉ आनंद नगर, डॉक्टर विनय, डॉक्टर विनय कपूर और डॉक्टर नैमिष मेहता शामिल थे ।

क्या है चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना
 दरअसल राज्य सरकार ने 2 साल पहले चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना के नाम से पूरे परिवार का मेडिकल इंश्योरेंस करने की एक योजना चालू की थी। इस योजना के तहत एक परिवार के मुखिया अपने परिवार के लोगों की जानकारी एक कार्ड में भरकर इसकी जानकारी सरकार को देंगे और सरकार को इसके साथ ही करीब 8 सौ रुपए का शुल्क दिया जाएगा। उसके बाद इस योजना के तहत बहुत से ऑपरेशन एवं जांचे सरकार ने फ्री की है । लेकिन यह पहला ऑपरेशन है जो राजस्थान में किया गया है। महात्मा गांधी अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि अगर इस ऑपरेशन को निजी तौर पर कराया जाता तो इसमें करीब 13 से 15 लाख का खर्च होना तय था। डॉक्टर ने बताया कि अब भी करीब 12 लाख रुपए का खर्च हुआ है ,जिसमें से 10 लाख रुपए चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना के तहत माफ कर दिए गए हैं । यह पैसा सरकार के स्तर पर दिया जाएगा। बाकी बचे करीब 2 लाख पीड़ित बीमार पक्ष की ओर से दिए गए हैं।

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