Dhanteras 2026: दिवाली उत्सव 5 दिनों तक मनाया जाता है। इनमें से पहले दिन धनतेरस पर्व आता है। धनतेरस पर देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है। इससे जुड़ी एक रोचक कथा भी है। धनतेरस पर सभी को ये रोचक कथा जरूर सुननी चाहिए।
Dhanteras Vrat Katha In Hindi: इस बार धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस पर्व से जुड़ी अनेक मान्यताएं और परंपराएं हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं। इस दिन देवी लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। धनतेरस से जुड़ी एक रोचक धर्म ग्रंथों में बताई गई है। धनतेरस पर इस कथा को सभी जरूर सुनना चाहिए। आगे पढ़ें ये रोचक कथा…
धनतेरस की कथा
एक बार भगवान विष्णु धरती पर जाने लगे तो देवी लक्ष्मी ने भी उनके साथ चलने की इच्छा जताई। भगवान विष्णु ने उन्हें साथ चलने की अनुमति तो दे दी, लेकिन एक शर्त रखी कि वे रास्ते में किसी भी चीज के मोह में नहीं पड़ेंगी और दक्षिण दिशा की ओर नहीं देखेंगी। देवी लक्ष्मी ने उनकी बात मान ली।
धरती पर पहुंचने के बाद देवी लक्ष्मी खुद को रोक नहीं पाईं और दक्षिण दिशा की ओर देखने लगीं। वहां उन्हें सरसों के पीले फूल और गन्ने के हरे-भरे खेत दिखाई दिए। उनकी सुंदरता देखकर देवी लक्ष्मी मोहित हो गईं। उन्होंने सरसों के फूलों से अपना श्रृंगार किया और गन्ने का रस पीने लगीं।
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भगवान विष्णु को यह देखकर नाराजगी हुई कि देवी लक्ष्मी ने अपनी शर्त तोड़ दी है। उन्होंने उन्हें दंड देते हुए कहा कि अब उन्हें 12 साल तक धरती पर एक गरीब किसान के खेत में रहकर उसकी सेवा करनी होगी।
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देवी लक्ष्मी के किसान के घर पहुंचते ही उसकी किस्मत बदल गई। देखते ही देखते उसकी गरीबी दूर हो गई और घर में धन-संपत्ति आने लगी। 12 साल पूरे होने पर भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी को वापस लेने धरती पर आए, लेकिन किसान उन्हें जाने देने के लिए तैयार नहीं हुआ।
तब देवी लक्ष्मी ने किसान को अपना असली परिचय दिया और बताया कि उन्हें वैकुंठ लौटना होगा। साथ ही उन्होंने वादा किया कि वे हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी धनतेरस की रात उसके घर जरूर आएंगी।
इसके बाद किसान हर साल धनतेरस पर घर की सफाई करता और रातभर घी का दीपक जलाकर देवी लक्ष्मी का स्वागत करता। मान्यता है कि तभी से धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने और दीपक जलाने की परंपरा शुरू हुई।




