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Diwali 2026 Puja Vidhi: ये है देवी लक्ष्मी को खुश करने की सबसे आसान पूजा विधि, जानें मंत्र, मुहूर्त और आरती भी
Diwali 2026 Shubh Muhurat: कार्तिक मास की अमावस्या पर दिवाली मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी धरती पर आती हैं और अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करती हैं। इसलिए इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है।

दिवाली पर कैसे करें लक्ष्मी पूजा?
Diwali 2026 Lakshmi Puja: इस साल दीपावली का त्योहार 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। दिवाली की शाम घरों में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दीपावली पर शुभ समय में विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है। आगे जानिए दिवाली पर कैसे करें देवी लक्ष्मी की पूजा, कौन-सा मंत्र बोलें, शुभ मुहूर्त सहित पूरी डिटेल…

दिवाली 2026 शुभ मुहूर्त
दिवाली 2026 के चौघड़िया मुहूर्त
चर मुहूर्त- सुबह 8:00 से 9:24 बजे तक
लाभ मुहूर्त- सुबह 9:24 से 10:47 बजे तक
अमृत मुहूर्त- सुबह 10:47 से दोपहर 12:10 बजे तक
शुभ मुहूर्त- दोपहर 1:34 से 2:57 बजे तक
चर मुहूर्त- शाम 4:55 से 7:21 बजे तक
अमृत मुहूर्त- रात 8:57 से 10:34 बजे तक
लाभ मुहूर्त- रात 1:48 से 3:24 बजे तक
दिवाली 2026 स्थिर लग्न मुहूर्त
वृश्चिक लग्न- सुबह 7:21 से 9:40 बजे
कुंभ लग्न- दोपहर 1:27 से 2:55 बजे
वृषभ लग्न- शाम 5:55 से 7:51 बजे
सिंह लग्न- रात 12:27 से 2:45 बजे
दिवाली 2026 के अन्य शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त-सुबह 11:48 से दोपहर 12:33 तक
प्रदोष काल मुहूर्त- शाम 05:45 से रात 08:09 तक
गोधूलि बेला मुहूर्त- शाम 05:19 से 06:07 तक
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दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा विधि-मंत्र
- 8 नवंबर की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत यानी चावल और फूल लेकर दीपावली की पूजा का संकल्प लें। दिनभर घर में साफ-सफाई और पवित्रता बनाए रखें।
- जिस स्थान पर पूजा करनी है, उसे अच्छी तरह साफ कर लें। गंगाजल छिड़ककर उस जगह को पवित्र करें। पूजा की सभी जरूरी सामग्री पहले से एकत्रित कर लें और साफ कपड़े पहनकर परिवार के सदस्यों के बैठने के लिए आसन बिछाएं।
- शुभ मुहूर्त शुरू होने पर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। अब चौकी पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और देवी सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके पास पानी से भरा कलश भी रखें।
- कलश पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाएं और मौली बांधें। इसके ऊपर नारियल रखें और उस पर तिलक लगाएं। इसके बाद सभी देवी-देवताओं को तिलक लगाकर चावल चढ़ाएं और फूलों की माला पहनाएं।
- पूजा की सामग्री पर जल छिड़कते हुए ये मंत्र बोलें-
ऊं अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:।।
- पूजा की चौकी पर शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके साथ धूप भी लगाएं। 11 या 21 छोटे दीपकों में तेल भरकर रख दें। इसके बाद मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और देवी सरस्वती को अबीर, गुलाल, हल्दी और चंदन अर्पित करें।
- मां लक्ष्मी को कमल का फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है। सभी देवी-देवताओं को इत्र और पान अर्पित करें। इसके बाद फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पकवानों का भोग लगाएं।
- अब पूजा के लिए रखे सभी दीपक प्रज्वलित करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और देवी सरस्वती की आरती करें। आरती पूरी होने के बाद हाथ में जल लेकर जमीन पर छोड़ें और यह मंत्र बोलें-
ऊं अनेन यथाशक्त्यर्चनेन श्रीमहालक्ष्मी: प्रसीदतु।
- अब हाथ में थोड़े चावल लें और उन्हें जमीन पर छोड़ते हुए नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें-
यान्तु देवगणा: सर्वे पूजामादाय मामकीम्।
इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनरागमनाय च।।
- इस तरह दिवाली पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और देवी सरस्वती की पूजा पूरी करें। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ की गई पूजा से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
- पूजा में जलाया गया मुख्य दीपक रातभर जलता रहने दें और अगले दिन उसे उठाएं। दीपक को सुरक्षित जगह पर रखें। ऐसा करने से देवी लक्ष्मी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी।
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मां लक्ष्मी की आरती लिरिक्स हिंदी में
ऊं जय लक्ष्मी माता, जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसिदिन सेवत हर विष्णु-धाता।। ऊं।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।। ऊं...।।
दुर्गारूप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि-सिद्धि धन पाता।। ऊं...।।
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधिकी त्राता।। ऊं...।।
जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहिं घबराता।। ऊं...।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता।
खान-पान का वैभव सब तुमसे आता।। ऊं...।।
शुभ-गुण-मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता।। ऊं...।।
महालक्ष्मी(जी) की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।। ऊं...।।
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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