Gudi Padwa 2025: हिंदू नववर्ष के पहले दिन गुड़ी पड़वा पर्व मनाया जाता है। इस त्योहार से अनेक परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जो इसे और भी खास बनाती हैं। इस बार गुड़ी पड़वा 30 मार्च, रविवार को है। 

Gudi Padwa Traditions: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष की शुरूआत होती है। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में ये पर्व विभिन्न नाम और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इस बार गुड़ी पड़वा 30 मार्च, रविवार को मनाया जाएगा। इस पर्व से अनेक परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जो इसे और भी खास बनाती हैं। इन परंपराओं के बिना गुड़ी पड़वा पर्व अधूरा माना जाता है। आगे जानिए ऐसी ही 3 परंपराओं के बारे में…

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गुड़ी पड़वा पर खाते हैं नीम-मिश्री

गुड़ी पड़वा के दिन नीम के पत्ते और मिश्री खाने की परंपरा है। इस परंपरा के पीछे गहरा वैज्ञानिक कारण छिपा है। आयुर्वेद की माने तो गुड़ी पड़वा पर्व शीत और ग्रीष्म ऋतु के संधि काल में मनाया जाता है। इस मौसम में कईं तरह के रोग होने की संभावना रहती है। इस समय नीम की कोमल पत्तियां चबाने से रोग होने की संभावना खत्म हो जातीहै और खून भी साफ होता है।

इस दिन करते हैं गुड़ी की पूजा

गुड़ी पड़वा पर महाराष्ट्रीय परिवारों में गुड़ी की पूजा करने की परंपरा भी है। इस दिन डंडे के ऊपर एक लोटा उल्टा रखकर इस पर आंख, नाक, कान व मुंह की आकृति बनाई जाती है, इस पर रेशमी वस्त्र जिसे सोला कहते हैं पहनाया जाता है और पूजा की जाती है। इसे ही गुड़ी कहते हैं। मान्यता है कि गुड़ी की पूजा करने से साल भर सुख-समृद्धि बनी रहती है।

गुड़ी पड़वा पर खाते हैं खास पकवान

गुड़ी पड़वा पर खास पकवान बनाए जाते हैं, इन सभी में पूरन पोली सबसे प्रमुख होती है। इसके बिना ये पर्व अधूरा माना जाता है। पूरन पोली मीठी रोटी की तरह होती है, जिसमें चने की दाल का मिश्रण भरा जाता है और शुद्ध घी से सेका जाता है। इस तरह का भोजन हमें बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है।


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इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।