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किस मंदिर में मनेगी सबसे पहले राखी, कितने लाख लड्डुओं का लगेगा भोग?

Rakshabandhan 2024: इस बार रक्षाबंधन का पर्व 19 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन देश के प्रमुख मंदिरों में भी रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। देश में सबसे पहले राखी का पर्व उज्जैन में मनाया जाएगा। 

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Author : Manish Meharele
Published : Aug 11 2024, 12:16 PM IST
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कब है रक्षाबंधन 2024?
Image Credit : Getty

कब है रक्षाबंधन 2024?

Rakshabandhan 2024 Mahkal Mandir: हर साल सावन के अंतिम दिन यानी पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 19 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन का पर्व देश के प्रमुख मंदिरों में भी मनाया जाता है। इस दिन पंडे-पुजारी भगवान को रक्षा सूत्र अर्पित करते हैं और देश की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। देश में सबसे पहले रक्षाबंधन का पर्व किस मंदिर में मनाया जाएगा। आगे जानिए…

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कहां मनेगा सबसे पहले राखी का पर्व?
Image Credit : Social Media

कहां मनेगा सबसे पहले राखी का पर्व?

19 अगस्त, सोमवार को देश में सबसे पहली राखी मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल मंदिर में मनाई जाएगी। यहां सुबह 4 बजे की जाने वाली भस्मारती में भगवान महाकाल को रक्षा सूत्र अर्पित किया जाएगा। ये राखी पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा विशेष रूप से हर साल तैयार की जाती है। इस राखी की लंबाई लगभग 4 फीट होती है। इस राखी में मोरपंख व अन्य रत्नों का इस्तेमाल किया जाता है।

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लगेगा सवा लाख लड्डुओं का भोग
Image Credit : Social Media

लगेगा सवा लाख लड्डुओं का भोग

रक्षाबंधन के मौके पर हर साल की तरह इस साल भी भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। इन लड्डुओं को बनाने का काम 4 दिन पहले ही शुरू हो जाता है। इसके लिए लगभग 100 डिब्बे शुद्ध घी, 30 किवंटल बेसन, 45 किलो शक्कर के साथ सूखे मेवों का उपयोग किया जाएगा। खास बात ये है कि भगवान महाकाल को रक्षाबंधन पर हर साल पुजारियों द्वारा सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

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सावन की अंतिम सवारी भी इसी दिन
Image Credit : Social Media

सावन की अंतिम सवारी भी इसी दिन

19 अगस्त को सावन मास का अंतिम दिन रहेगा। इस दिन सोमवार होने से भगवान महाकाल की सवारी भी निकाली जाती है। ये सवारी सावन की अंतिम सवारी रहेगी। इसके बाद भाद्रपद मास के 2 सोमवार को भी भगवान महाकाल की सवारी निकाली जाएगी। रक्षाबंधन पर सावन सोमवार होना एक दुर्लभ संयोग है, जो कईं सालों में एक बार बनता है।


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Disclaimer
इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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About the Author

MM
Manish Meharele
मनीष मेहरेले। मीडिया में 19 साल का अनुभव, अभी एशियानेट न्यूज हिंदी के डिजिटल में काम कर रहे हैं। महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। ज्योतिष-हस्तरेखा, उपाय, वास्तु, कुंडली जैसे टॉपिक पर पकड़ है। यह जीव विज्ञान में बीएससी स्नातक हैं । करियर की शुरुआत स्थानीय अखबार दैनिक अवंतिका से की। 2010 से 2019 तक दैनिक भास्कर डॉट कॉम में धर्म डेस्क पर काम किया है।

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