Unique Temple: भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है। यहां ऐसे अनेक मंदिर हैं जो अपने अंदर कईं रहस्य समेटे हुए हैं। इन्हीं में से एक उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित है। इस मंदिर में एक रहस्यमयी त्रिशूल है। इस त्रिशूल से जुड़ी अनेक मान्यताएं हैं।

Uttarkashi Shakti Temple Interesting Facts: उत्तराखंड को देवभूमि भी कहा जाता है। इसकी वजह है कि यहां एक से बढ़कर एक प्राचीन मंदिर जैसे केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनौत्री, गंगौत्री आदि हैं। ऐसा ही एक मंदिर उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में भी है। इस मंदिर का नाम है शक्ति मंदिर। ये मंदिर विश्वनाथ मंदिर के समीप स्थित है। इस मंदिर में एक त्रिशूल स्थापित है। यही त्रिशूल यहां का सबसे बड़ा रहस्य है। लोग इसे देखने और पूजा करने दूर-दूर से आते हैं। ऐसा भी कहा जाता है देवी दुर्गा ने इसी त्रिशूल से राक्षसों का वध किया था। इस शक्ति मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण के केदारखंड में मिलता है। इस मंदिर को देवी राजराजेश्वरी के नाम से जाना जाता है। आगे जानिए क्यों खास है ये त्रिशूल…

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इस त्रिशूल को कहते हैं शक्ति स्तंभ

उत्तरकाशी के शक्ति मंदिर में स्थापित इस त्रिशूल को शक्ति स्तंभ कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब महिषासुर ने अपने अनेक वरदान पाकर देवताओं को युद्ध में हरा दिया तो सभी देवताओं ने देवी दुर्गा का आवाहन किया। देवी दुर्गा ने अपने दिव्य त्रिशूल से महिषासुर सहित सभी दानवों का अंत कर दिया और इस स्थान पर आकर अपना त्रिशूल स्थापित कर दिया। तभी ये त्रिशूल यहां स्थापित है। देवी दुर्गा यानी शक्ति का त्रिशूल होने के कारण ही इसे शक्ति स्तंभ भी कहा जाता है।

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वैज्ञानिक नहीं जान पाए ये रहस्य

इस त्रिशूल से जुड़ी एक अन्य मान्यता ये भी कि ये किस धातु से बना है, इसका बता आज तक कोई नहीं लगा पाया है। वैज्ञानिकों ने भी अनेक प्रयास कर लिए लेकिन इस धातु के बारे में जानकारी नहीं निकाल पाए। इस त्रिशूल की ऊंचाई लगभग 20 फीट है लेकिन ये जमीन में कितनी गहराई तक धंसा हुआ है, इसके बारे में कोई नहीं जानता है। कहते हैं कि इस त्रिशूल का धंशा हुआ हिस्सा पाताल लोक तक जाता है। नवरात्रि आदि मौकों पर इस त्रिशूल के दर्शन करने वालों भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

अजीब है त्रिशूल का आकार

इस त्रिशूल से जितने रहस्य जुड़े हैं, उतना ही रहस्यमयी इसका आकार भी है। इसके बीच का शूल तलवार जैसा है और आस-पास के शूलों का आकार खड़ग के समान है। कहते हैं ये त्रिशूल पूरी ताकत लगाने पर भी जरा सा नहीं हिलता लेकिन यदि कोई सच्चे मन से देवी का ध्यान करते हुए इसे हिलाने की कोशिश करे तो एक अंगुली से भी ये हिलने लगता है। यही इस त्रिशूल की सबसे बड़ी विशेषता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।