When is Mahashivratri 2025: साल 2025 में महाशिवरात्रि पर्व बहुत ही खास रहेगा क्योंकि इस बार ग्रहों का बहुत ही खास संयोग बन रहा है। इस दुर्लभ संयोग में की गई शिव पूजा बहुत ही शुभ फल देने वाली रहेगी। 

Kab Hai Mahashivratri 2025: धर्म ग्रंथों के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि पर ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसके चलते इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दुर्लभ संयोग में की गई शिव पूजा हर तरह से शुभ फल देने वाली रहेगी। ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहों का ऐसा दुर्लभ संयोग कईं दशकों में एक बार बनता है। आगे जानिए कब है महाशिवरात्रि और इस दिन कौन-सा दुर्लभ संयोग बनेगा?

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कब है महाशिवरात्रि 2025? (Mahashivratri 2025 Date)

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 26 फरवरी, बुधवार की सुबह 11:08 से शुरू होगी, जो 27 फरवरी, गुरुवार की सुबह 08:54 मिनिट तक रहेगी। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा के अनुसार, महाशिवरात्रि व्रत में रात्रि पूजन का महत्व है। चूंकि चतुर्दशी 26 फरवरी को रात भर रहेगी, इसलिए महाशिवरात्रि व्रत भी इसी दिन किया जाएगा। महाशिवरात्रि व्रत का पारणा 27 फरवरी, गुरुवार को किया जाएगा।

कौन-सा दुर्लभ संयोग बनेगा महाशिवरात्रि पर?

ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा के अनुसार, 26 फरवरी, बुधवार को महाशिवरात्रि के मौके पर सूर्य, बुध और शनि एक साथ कुंभ राशि में रहेंगे। इसके पहले ऐसा संयोग साल 1965 में बना था, जब ये तीनों ग्रह महाशिवरात्रि पर एक ही राशि में थे। ग्रहों का ये दुर्लभ योग बहुत ही शुभ फल देने वाला रहेगा। इस दुर्लभ संयोग में की गई पूजा-पाठ से कुंडली से जुड़े ग्रह दोष भी शांत हो सकते हैं।

ये शुभ योग भी रहेंगे इस दिन

26 फरवरी को त्रिग्रही योग के अलावा और भी कईं शुभ योग बनेंगे। इस दिन परिघ नाम का शुभ योग दिन भर रहेगा, वहीं रात में महाशिवरत्रि पूजन के दौरान शिव नाम का योग भी बनेगा। इनके अलावा छत्र और मित्र नाम के 2 अन्य शुभ योग भी इस दिन रहेंगे। इतने सारे शुभ योगों के चलते इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।


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Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।