T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद कप्तान सूर्यकुमार, जय शाह और गंभीर ट्रॉफी लेकर हनुमान मंदिर पहुंचे। इस पर 1983 विश्व कप विजेता कीर्ति आज़ाद ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह जीत किसी एक धर्म की नहीं, बल्कि पूरे भारत की है।
अहमदाबाद: T20 वर्ल्ड कप में भारत की शानदार जीत के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव, ICC चेयरमैन जय शाह और हेड कोच गौतम गंभीर ट्रॉफी लेकर अहमदाबाद के एक हनुमान मंदिर पहुंचे। इस घटना पर 1983 वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आज़ाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट कर कहा कि वर्ल्ड कप ट्रॉफी को किसी एक धर्म की जीत के तौर पर नहीं दिखाना चाहिए।
दरअसल, रविवार को भारत ने न्यूज़ीलैंड को हराकर T20 वर्ल्ड कप जीता था। इसके बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव, BCCI के पूर्व सचिव और मौजूदा ICC चेयरमैन जय शाह और कोच गौतम गंभीर ट्रॉफी के साथ अहमदाबाद के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। इसकी तस्वीरें सामने आने के बाद ही कीर्ति आज़ाद ने इस पर सवाल उठाए।
कीर्ति आज़ाद ने 'X' पर लिखा, '1983 में जब कपिल देव की कप्तानी में हमने वर्ल्ड कप जीता था, तो उस टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी थे। हम ट्रॉफी अपनी मातृभूमि भारत लाए थे। भारत की क्रिकेट ट्रॉफी को इस तरह एक धर्म से क्यों जोड़ा जा रहा है? यह टीम भारत को रिप्रेजेंट करती है, न कि सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार को। मोहम्मद सिराज इस ट्रॉफी को किसी मस्जिद में लेकर नहीं गए, और वर्ल्ड कप के स्टार होने के बावजूद संजू सैमसन भी ट्रॉफी लेकर किसी चर्च में नहीं गए। यह वर्ल्ड कप सभी धर्मों को मानने वाले 140 करोड़ भारतीयों का है। यह किसी एक धर्म की जीत नहीं है।'
आज़ाद ने आगे कहा कि वर्ल्ड कप जीत के उत्साह के बीच ट्रॉफी को मंदिर ले जाना सही नहीं था। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि खेल की उपलब्धियों को धार्मिक समारोहों से मिलाने से टीम की धर्मनिरपेक्ष छवि पर असर पड़ता है। वर्ल्ड कप जीत के जश्न के बीच उठे इस विवाद ने क्रिकेट फैंस के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

