दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के प्रशासन के लिए तदर्थ समिति बहाल करने का आदेश दिया है। WFI ने इस आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है।

नई दिल्ली: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के प्रशासन के लिए तदर्थ समिति बहाल करने का दिल्ली हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश आया है। कोर्ट ने भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को यह निर्देश दिया है। इस आदेश से WFI मुश्किल में पड़ गया है।

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ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह अहम आदेश दिया। याचिका में IOA की तदर्थ समिति को बहाल करने की मांग की गई थी। इस आदेश के बाद WFI अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि वे विश्व कुश्ती और IOC से मदद मांगेंगे।

WFI के अध्यक्ष संजय सिंह ने महासंघ के अधिकारों को कम करने के फैसले की निंदा की है और कहा है कि वे इसके खिलाफ अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में वैश्विक कुश्ती महासंघ (UWW) और अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) से भी मदद मांगेंगे। 

‘हम इसके खिलाफ संयुक्त समिति में अपील करेंगे। वैश्विक कुश्ती, IOC से भी गुहार लगाएंगे। बाहरी हस्तक्षेप से खिलाड़ियों पर असर पड़ सकता है, यह चेतावनी UWW, IOC ने पहले ही दी थी। अब 2 विश्व चैंपियनशिप शुरू होने वाली हैं। हाईकोर्ट के आदेश से हमारे पहलवानों पर असर पड़ेगा’ ऐसा संजय सिंह ने कहा।

भारतीय पहलवानों पर पड़ सकता है असर

WFI का नियंत्रण स्वतंत्र समिति को सौंपे जाने से विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत की भागीदारी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 19 से 25 अगस्त तक जॉर्डन में अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप और 2 से 8 सितंबर तक स्पेन में अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप होनी है। 

लेकिन WFI पर स्वतंत्र समिति का नियंत्रण होने पर उसे मान्यता नहीं देने की बात वैश्विक कुश्ती संस्था पहले ही स्पष्ट कर चुकी है। ऐसे में अगर नई नियुक्त स्वतंत्र समिति विश्व चैंपियनशिप के लिए भारतीय पहलवानों का चयन भी करती है तो वैश्विक कुश्ती संस्था उसे रोक सकती है।