बिलासपुर के किसान महेश कश्यप ने उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक खेती अपनाकर बड़ी सफलता हासिल की। ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और जैविक खेती तकनीक से उन्होंने बैंगन और सब्जी उत्पादन कर 14 से 15 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड अंतर्गत कछार गांव के किसान महेश कश्यप आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। कभी पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और कम मुनाफे से परेशान रहने वाले महेश कश्यप ने उद्यानिकी विभाग की मदद से आधुनिक खेती को अपनाया और अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव किया।

उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली खेती की दिशा
महेश कश्यप पहले पारंपरिक फसलों की खेती करते थे, लेकिन उद्यानिकी department की समेकित उद्यानिकी विकास योजना ने उनकी सोच और खेती के तरीके को पूरी तरह बदल दिया। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 2 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण और फेंसिंग के लिए अनुदान प्राप्त किया। सरकारी सहायता का लाभ उठाकर उन्होंने आधुनिक तकनीक आधारित सब्जी उत्पादन मॉडल तैयार किया, जिससे खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सका।
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक से बढ़ा उत्पादन
महेश कश्यप ने अपने खेतों में वैज्ञानिक और आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग किया। उन्होंने ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाई, जिससे पानी की बचत हुई और फसलों को सही मात्रा में पोषण मिल पाया। इससे खरपतवार की समस्या भी कम हुई। इसके साथ ही उन्होंने मिट्टी में नमी बनाए रखने और भूमि कटाव रोकने के लिए मल्चिंग तकनीक का प्रभावी उपयोग किया। वर्मी कंपोस्ट और जैविक खाद के इस्तेमाल से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई।
बैंगन और सब्जी खेती से हुई लाखों की कमाई
महेश कश्यप ने लगभग 4.5 एकड़ क्षेत्र में बैंगन की खेती की। इसके साथ ही उन्होंने अंतरवर्ती फसल के रूप में कद्दू और अन्य मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी किया। उन्होंने बताया कि इस खेती से करीब 900 से 1100 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है। खेती में लगभग 7 से 8 लाख रुपये की लागत आई, जबकि सब्जियों की बिक्री से उन्हें 14 से 15 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
बिलासपुर के किसानों के लिए बने रोल मॉडल
महेश कश्यप आज आत्मनिर्भर किसान बन चुके हैं और अन्य किसानों को भी आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ लेकर और नई तकनीकों का उपयोग कर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उद्यानिकी विभाग की यह पहल बिलासपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।


