गुरु रविदास की 650वीं जयंती पर दिल्ली में BJP ने ‘समरसता संकल्प अभियान’ शुरू किया। माटी कलश के जरिए समानता, एकता और मानव सम्मान का संदेश पहुंचाया जाएगा।

नई दिल्ली। संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज जी की 650वीं जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली में ‘समरसता संकल्प अभियान एवं पावन माटी कलश वितरण’ कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का मकसद संत रविदास के समानता, सामाजिक एकता और मानव सम्मान के संदेश को समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने की। इस मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद रहीं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, सांसद, मंत्री, जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और संत समाज के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए।

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Guru Ravidas Jayanti: सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संत रविदास का संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने संत रविदास महाराज को नमन किया। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास ने अपने समय में सामाजिक ऊंच-नीच और विभिन्न कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में समानता की मजबूत सोच को आगे बढ़ाया।

नबीन ने कहा कि संत रविदास के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। समानता, सम्मान और सामाजिक एकता का उनका संदेश समाज को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है। उनके मुताबिक, ‘समरसता संकल्प अभियान’ का उद्देश्य संत रविदास के इन्हीं विचारों को लोगों तक पहुंचाना है, ताकि सामाजिक सद्भाव और एकता की भावना को और मजबूत किया जा सके।

Samrasta Sankalp Abhiyan: 29 जुलाई से शुरू हुआ अभियान

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि ‘समरसता संकल्प अभियान’ की शुरुआत 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर की गई थी। अभियान के तहत संत रविदास की तपोभूमि से जुड़ी पावन माटी को कलशों में लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की पहल की जा रही है।

पार्टी का कहना है कि ये माटी कलश सिर्फ धार्मिक या प्रतीकात्मक सामग्री नहीं हैं। इनके जरिए संत रविदास के सामाजिक समरसता, भाईचारे और एकता के विचारों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। नितिन नबीन ने इस अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि इस सोच के केंद्र में समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने की भावना है।

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Delhi CM Rekha Gupta: संत रविदास ने दिखाया समानता का रास्ता

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी कार्यक्रम में संत रविदास के विचारों को याद किया। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने ऐसा समाज बनाने का रास्ता दिखाया, जिसमें समानता, श्रम की प्रतिष्ठा और हर व्यक्ति के सम्मान को महत्व दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास का संदेश आज भी समाज को न्याय, समानता, एकता और समावेश की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनके विचारों को केवल स्मरण करने के बजाय सामाजिक जीवन में उतारना जरूरी है। रेखा गुप्ता ने कहा कि संत रविदास की तपोभूमि से लाई गई पावन माटी को इसी व्यापक भावना से देखा जाना चाहिए। इन कलशों में केवल मिट्टी नहीं, बल्कि समरसता, एकात्मता और सामाजिक समानता का संदेश भी जुड़ा है।

सामाजिक समानता और समान अवसर पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरणा लेते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और गरिमा देने का सामूहिक संकल्प होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत रविदास के आदर्शों को अपने सामाजिक व्यवहार में शामिल करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उनका संदेश किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना को मजबूत करने वाला है।

BJP कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

समरसता संकल्प अभियान के इस कार्यक्रम में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवेश कुमार राम, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्य, पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत गौतम सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके अलावा सांसदों, दिल्ली सरकार के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, पार्टी पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। संत समाज और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और व्यापक बनाया।

Guru Ravidas: समानता और श्रम की गरिमा का संदेश

कार्यक्रम के जरिए भाजपा ने संत रविदास के उन विचारों को फिर सामने रखा, जिनमें समाज में ऊंच-नीच और भेदभाव के बजाय समानता और मानव गरिमा को महत्व दिया गया है। संत रविदास की शिक्षाओं में श्रम को सम्मान देने और व्यक्ति को उसकी सामाजिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों के आधार पर देखने की भावना प्रमुख रही है। यही वजह है कि उनके विचार आज भी सामाजिक समरसता और समानता की चर्चाओं में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कार्यक्रम के अंत में संत रविदास के समानता, सामाजिक समरसता, श्रम की गरिमा और मानव सम्मान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया। साथ ही समाज के हर वर्ग को एकता, सद्भाव और आपसी सम्मान के सूत्र में जोड़ने की बात कही गई।