राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु दिल्ली के 1.4 लाख CCTV कैमरे बदले जाएंगे। विदेशी, खासकर चीनी कैमरों की जगह 'मेक इन इंडिया' सिस्टम लगेंगे, ताकि संवेदनशील डेटा देश में सुरक्षित रहे। 2026 से STQC सर्टिफिकेशन अनिवार्य होगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से दिल्ली में लगे करीब 1.4 लाख CCTV कैमरों को बदलने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। सरकार मौजूदा विदेशी, विशेष रूप से चीनी कंपनियों के कैमरों की जगह भारत में विकसित CCTV सिस्टम लगाने पर विचार कर रही है, ताकि संवेदनशील डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रखा जा सके।

सुरक्षा कारणों से लिया जा रहा फैसला

दिल्ली में राष्ट्रपति भवन, संसद, प्रधानमंत्री कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट, केंद्रीय मंत्रालय और कई रणनीतिक संस्थान मौजूद हैं। ऐसे में राजधानी की निगरानी व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए सरकार स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता देना चाहती है।

भारतीय कंपनियां दौड़ में आगे

इस परियोजना के लिए देश की प्रमुख CCTV निर्माता कंपनियां दावेदारी पेश कर रही हैं। इनमें स्पर्श (Sparsh) का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। कंपनी का कहना है कि उसने वर्ष 2008 में भारत का पहला स्वदेशी CCTV कैमरा विकसित किया था और तब से रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों तथा चिनाब ब्रिज जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपने कैमरे स्थापित किए हैं।

आधुनिक तकनीक पर आधारित सिस्टम

स्पर्श के चीफ ग्रोथ ऑफिसर स्पर्श सहगल के मुताबिक, कंपनी की शुरुआत विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से हुई थी। उनका कहना है कि आज भारतीय CCTV कैमरे आधुनिक फीचर्स, मजबूत साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं।

STQC सर्टिफिकेशन हुआ अनिवार्य

सरकार ने अप्रैल 2026 से CCTV कैमरों के लिए STQC (Standardisation Testing and Quality Certification) प्रमाणन अनिवार्य कर दिया है। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध कैमरे साइबर सुरक्षा से जुड़े तय मानकों का पालन करें। माना जा रहा है कि इससे घरेलू कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी निर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धा पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होगी।

डेटा सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि CCTV कैमरे लगातार सार्वजनिक स्थानों की निगरानी करते हैं। यदि इनका डेटा देश से बाहर के सर्वरों पर संग्रहित होता है तो सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ सकते हैं। इसी वजह से सरकार 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत ऐसे निगरानी सिस्टम को बढ़ावा देना चाहती है, जिनका पूरा डेटा भारत में ही सुरक्षित रहे और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता न हो।