दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को जनसुनवाई में फोर्टिस शालीमार बाग अस्पताल के खिलाफ एक शिकायत मिली थी। इसके बाद उन्होंने तुरंत अस्पताल की जांच के आदेश दिए। अस्पताल मैनेजमेंट ने कहा है कि वो जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
नई दिल्ली। दिल्ली के शालीमार बाग में मौजूद फोर्टिस अस्पताल ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के जांच के आदेश के बाद शुक्रवार को कहा कि वो जांच में पूरा सहयोग करेगा। फोर्टिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "जब हमें अधिकारियों से औपचारिक तौर पर जानकारी मिलेगी, तो हम उसकी समीक्षा करेंगे और जांच में पूरा सहयोग देंगे। मरीजों की सुरक्षा और देखभाल हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।"

जन सुनवाई में शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की 'जन सुनवाई' में एक शख्स ने अस्पताल के खिलाफ शिकायत की। इसके बाद सीएम ने फौरन जिला प्रशासन को फोर्टिस अस्पताल की जांच करने का निर्देश दिया।
CMO की टीम ने अस्पताल का किया निरीक्षण, शुरुआती जांच में मिलीं गड़बड़ियां
दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के मुताबिक, अधिकारियों की एक टीम ने गुरुवार को अस्पताल का दौरा कर मौके पर ही जांच की। CMO ने बताया,
सीएम जनसुनवाई में मिली एक शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने जिला प्रशासन को फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग की तत्काल जांच करने का निर्देश दिया। अधिकारियों की एक टीम ने अस्पताल का मौके पर निरीक्षण किया। इसमें कुछ गड़बड़ियां पाई गई हैं। इसकी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और उसकी बारीकी से जांच होगी।
जांच में दोषी पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई
CMO ने यह भी साफ कर दिया कि सरकार किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। अगर जांच में कोई भी गड़बड़ी साबित होती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। बयान में कहा गया, "दिल्ली के हर अस्पताल का फर्ज है कि वो मरीजों की सेवा जिम्मेदारी और ईमानदारी से करे। मरीजों को समय पर और सम्मानजनक देखभाल मिले, इस अधिकार से कोई समझौता नहीं हो सकता।"
दिल्ली सरकार ने बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स हेल्थ स्कीम को दी मंजूरी
इससे पहले, दिल्ली सरकार ने एक कैबिनेट बैठक में 'बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स हेल्थ स्कीम' को भी मंजूरी दी थी। इस स्कीम के तहत, 2.7 लाख रजिस्टर्ड कंस्ट्रक्शन मजदूरों और उनके परिवारों समेत करीब 10 लाख लोगों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
CMO ने कहा, "दिल्ली सरकार ने 'बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स हेल्थ स्कीम' को मंजूरी दे दी है, जिससे 2.7 लाख रजिस्टर्ड निर्माण मजदूरों और उनके परिवारों सहित लगभग 10 लाख लाभार्थियों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। मजदूरों के लिए ₹2 लाख और उनके परिवारों के लिए ₹10 लाख तक के इलाज के साथ, वार्षिक स्वास्थ्य जांच, पैनल में शामिल अस्पताल, इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के साथ, दिल्ली अपने वर्कफोर्स की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत कर रही है।"
मजदूरों और परिवारों को मिलेगा ₹10 लाख तक कैशलेस इलाज
हर रजिस्टर्ड मजदूर को पैनल में शामिल अस्पतालों में 2 लाख रुपये तक का इलाज मिलेगा, जबकि परिवार के लिए यह लिमिट 10 लाख रुपये तक होगी। पूरा इलाज कैशलेस होगा, जिससे मजदूरों और उनके परिवारों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
हेल्थ चेकअप, OPD, IPD और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की भी सुविधा
इस स्कीम में रजिस्टर्ड मजदूरों और उनके जीवनसाथी की सालाना हेल्थ जांच भी शामिल है। इसके अलावा, लाभार्थियों को फ्री OPD और IPD सेवाएं, डायग्नोस्टिक और लैब सुविधाएं, इमरजेंसी मेडिकल मदद और रेफरल सेवाएं भी मिलेंगी। कंस्ट्रक्शन साइट्स और मजदूरों की ज्यादा आबादी वाले इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए भी स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएंगी।
डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और 24x7 हेल्पलाइन से मिलेगी बेहतर सुविधा
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस स्कीम के तहत लाभार्थियों का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड बनाया जाएगा और सेवाओं की डिलीवरी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक मॉडर्न ट्रैकिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। मजदूरों की मदद के लिए 24x7 टोल-फ्री हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी।
सालाना 200 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार, पीएम मोदी का भी किया जिक्र
उन्होंने आगे कहा कि यह स्कीम सिर्फ स्वास्थ्य सेवा देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह मजदूरों और उनके परिवारों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा पहल है। सरकार को इस योजना पर सालाना लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हमेशा गरीबों, मजदूरों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

