Gujarat Health Passport Scheme: गुजरात सरकार ने हेल्थ पासपोर्ट योजना शुरू की है जिसमें बच्चों का जन्म से 18 साल तक का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार होगा। SH-RBSK के तहत 1.89 करोड़ बच्चों को लाभ मिलेगा। 

Gujarat Health Passport Scheme SH-RBSK: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए गुजरात सरकार ने बच्चों के लिए ‘हेल्थ पासपोर्ट’ योजना शुरू की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में यह कदम बच्चों और किशोरों की स्वास्थ्य सेवाओं को स्मार्ट, सरल और परिवार-हितैषी बनाने के लिए लिया गया है। इसका उद्देश्य जन्म से 18 साल तक हर बच्चे की पूरी स्वास्थ्य जानकारी एक ही दस्तावेज में सुरक्षित रखना है।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

SH-RBSK के तहत 1.89 करोड़ बच्चों की हेल्थ स्क्रीनिंग

यह योजना स्कूल हेल्थ - राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SH-RBSK) के तहत लागू की गई है। इसके अंतर्गत हर साल लगभग 1.89 करोड़ बच्चों की स्वास्थ्य जांच 992 मोबाइल हेल्थ टीमों द्वारा की जाती है। पहले इन जांचों का रिकॉर्ड केवल डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध था, लेकिन माता-पिता के लिए कोई आसान दस्तावेज नहीं था। नया हेल्थ पासपोर्ट इस कमी को दूर करेगा और सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सरल रूप में उपलब्ध कराएगा।

मोबाइल हेल्थ टीम से आसान हेल्थ पासपोर्ट प्रक्रिया

हेल्थ पासपोर्ट बनाने के लिए माता-पिता को किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। मोबाइल हेल्थ टीमें स्कूल, आंगनवाड़ी, मदरसा, गुरुकुल और स्पेशल स्कूलों में बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। जांच पूरी होते ही हेल्थ पासपोर्ट जारी कर दिया जाएगा। 5 साल तक के बच्चों और स्कूल न जाने वाले बच्चों का पासपोर्ट PHC मेडिकल ऑफिसर हर साल रिन्यू करेंगे, जबकि स्कूली बच्चों के लिए यह जिम्मेदारी स्कूल प्राचार्य निभाएंगे।

जन्म से 18 साल तक डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और 4D डेटा

यह हेल्थ पासपोर्ट बच्चे की पूरी मेडिकल हिस्ट्री का डिजिटल रिकॉर्ड होगा। इसमें जन्म से 18 साल तक की सभी स्वास्थ्य जांचें, 4D कैटेगरी यानी जन्मजात विकार, बीमारियां, पोषण की कमी और विकास संबंधी समस्याएं शामिल होंगी। साथ ही विकास, पोषण, रेफरल सेवाएं, हेल्थ टिप्स और इमरजेंसी नंबर भी इसमें दर्ज होंगे। यह पूरी तरह SH-RBSK डिजिटल पोर्टल से जुड़ा रहेगा।

डिजिटल इंटीग्रेशन और बेहतर हेल्थ मैनेजमेंट

अगर हेल्थ पासपोर्ट खो भी जाए, तो इसे फिर से जारी किया जा सकेगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य माता-पिता को बच्चों के स्वास्थ्य प्रबंधन में सक्रिय भागीदार बनाना है, जिससे परिवार, बच्चे और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय बन सके।