मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा शहर से सच्ची लगन से अपनी अड़चनों को छोटा दिखा कुछ कर गुजरने का जज्बा दिखाने वाली खबर सामने आई। पढ़ाई का साल ना बिगड़े इसलिए बीमार पड़ी मासूम बच्ची एंबुलेंस में बैठ परीक्षा देने पहुंची। मासूम के इस हिम्मत की हो रही तारीफ।

छिंदवाड़ा (chhindwara news). एक कहावत है हमारा इरादा नेक है तो कोई भी अड़चन हमारा रास्ता नहीं रोक सकती है। ऐसे ही पक्के इरादे वाला नजारा एमपी के छिंदवाड़ा शहर में देखने को मिला। दरअसल पांचवी क्लास की एक मासूम बच्ची ने अपना पढ़ाई का साल बचाने के लिए बीमारी के बाद भी परीक्षा देने पहुंची। बीमार होने के बाद भी छात्रा ने ऐसी हिम्मत दिखाई कि अब हर कोई उसके इस काम की तारीफ कर रहा है। पूरा मामला छिंदवाड़ा शहर के लोनियामारू गांव का है।

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मासूम छात्रा के चल रहे फाइनल एग्जाम

लोनियामारू गांव की रहने वाली अलीशा अली की तबीयत कुछ दिनों से खराब चल रही थी। पता चला कि वह ब्लड शुगर की बीमारी से ग्रसित है। इसी दौरान उसके फाइनल एग्जाम भी चल रहे है। अलीशा 5वीं क्लास में पढ़ती है। छात्रा का शनिवार के दिन मैथ्स का पेपर था। वह घर पर इसी की तैयारी कर रही थी कि उसकी तबीयत खराब होने लगी तो उसे घर वाले हॉस्पिटल लेकर गए। शनिवार की सुबह जब उसे होश आया तो उसने इसी हालत में परीक्षा देने की ठानी। उसकी लगन को देख घरवाले भी मान गए और हॉस्पिटल प्रशासन से बात की।

एंबुलेंस से पहुंची पेपर देने, 1 ही घंटे में साल्व कर लिया पेपर

छात्रा को डर था कि यदि उसने परीक्षा नहीं दी तो उसका पूरीा साल बिगड़ जाएगा। इसलिए उसने जिद की वह पेपर में उपस्थित रहेगी ताकि उसका रिजल्ट नहीं बिगड़े। उसकी जिद को मानते हुए बच्ची के पिता ने स्कूल के प्रिंसिपल अर्जुन डेहरिया से बात कि और बच्ची को एंबुलेंस में बैठाकर पेपर दिलाने स्कूल पहुंचे। विद्यालय प्रधानाचार्य की परमिशन पर छात्रा ने वहीं गाड़ी में बैठे अपना पेपर दिया। अलीशा की तैयारी ऐसी थी कि उसने एक ही घंटे में अपना पेपर कर लिया। इसके बाद परिजन उसे अपने घर लेकर आए।

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