ज्ञान भारतम् ऐप के जरिए दुर्लभ पांडुलिपियों के पंजीकरण में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। प्रदेश में अब तक 34 लाख से अधिक पन्नों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने प्राचीन ज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश ने भारत सरकार के 'ज्ञान भारतम् ऐप' के माध्यम से दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों के पंजीकरण और संरक्षण के मामले में पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि न केवल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिला रही है, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ज्ञान भारतम् ऐप में 34 लाख से अधिक पांडुलिपि पन्नों का हुआ पंजीकरण
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 3 जुलाई 2026 तक मध्यप्रदेश में ज्ञान भारतम् ऐप के जरिए कुल 34 लाख 45 हजार 439 पांडुलिपि पन्नों का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें से 12 लाख 13 हजार 127 पांडुलिपियों का सफल सत्यापन किया जा चुका है, जबकि बाकी पांडुलिपियां सत्यापन और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया में हैं। विभाग द्वारा चरणबद्ध तरीके से सभी अभिलेखों की जांच की जा रही है।
ज्ञान भारतम् अभियान के तहत प्रदेशभर में चल रहा विशेष पंजीकरण अभियान
राज्य सरकार ने ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत सभी जिलों में विशेष अभियान शुरू किया है, ताकि अधिक से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया जा सके। 1 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भोपाल सबसे आगे रहा, जहां 24 लाख 26 हजार 172 पांडुलिपियों का पंजीकरण हुआ।
इसके बाद इंदौर में 3,99,477, रीवा में 2,68,763, बैतूल में 1,00,593 तथा छिंदवाड़ा में 77,094 पांडुलिपियां दर्ज की गईं।
इसी तरह पन्ना में 64,257, सागर में 60,025, ग्वालियर में 29,870, उज्जैन में 20,995, रायसेन में 15,539, मंदसौर में 12,412, अनूपपुर में 11,829, नीमच में 8,950, मऊगंज में 8,406, खंडवा में 5,740, जबलपुर में 4,715, सतना में 4,061, नर्मदापुरम में 4,049, गुना में 3,937, उमरिया में 3,824, दतिया में 3,179, विदिशा में 2,745, सीधी में 2,497, अशोकनगर में 1,908, बालाघाट में 1,741, शहडोल में 1,397, टीकमगढ़ में 1,290, मंडला में 957, शिवपुरी में 943, धार में 870, भिंड में 800, रतलाम में 731, मुरैना में 655, शाजापुर में 638, बड़वानी में 614, सीहोर में 607, सिवनी में 564, छतरपुर में 381, देवास में 330, श्योपुर में 310, नरसिंहपुर में 254, राजगढ़ में 198, निवाड़ी में 177, खरगोन में 171, मैहर में 146, दमोह में 133, बुरहानपुर में 120, हरदा में 84, कटनी में 83, आगर मालवा में 57, सिंगरौली में 33, झाबुआ में 17, अलीराजपुर में 8, पांढुर्ना में 3 तथा डिंडोरी में 1 पांडुलिपि का पंजीकरण दर्ज किया गया।
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और हस्तलिखित धरोहर के संरक्षण के इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई है।
सांस्कृतिक राजधानी के रूप में मजबूत हो रही मध्यप्रदेश की पहचान
मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं वीरभारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के संकल्प को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश पूरी गंभीरता और जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान भारतम् ऐप के माध्यम से 34 लाख 45 हजार 439 दुर्लभ पांडुलिपियों का पंजीकरण होना और देश में पहला स्थान हासिल करना प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक विरासत के संरक्षण का प्रमाण है। उनके अनुसार यह केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की अमूल्य पांडुलिपि धरोहर को सुरक्षित रखकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार सभी जिलों में जनसहभागिता के साथ इस अभियान को लगातार आगे बढ़ा रही है। पांडुलिपियों का संरक्षण, डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण भारत की ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ मध्यप्रदेश को देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में और मजबूत बनाएगा।
टीकमगढ़ से मिला 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का दुर्लभ नक्शा
ज्ञान भारतम् मिशन के दौरान कई महत्वपूर्ण और दुर्लभ हस्तलिखित दस्तावेज सामने आए हैं। टीकमगढ़ जिले से 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का प्राचीन नक्शा प्राप्त हुआ है। इसमें भारतीय प्राचीन भूगोल का विस्तृत चित्रण किया गया है। नक्शे के मध्य में वृत्ताकार संरचना और उसके चारों ओर पर्वत श्रृंखलाओं एवं विभिन्न क्षेत्रों का उल्लेख है, जिसे अत्यंत दुर्लभ माना जा रहा है।
पन्ना, बुरहानपुर और दतिया से भी मिलीं ऐतिहासिक धरोहरें
पन्ना जिले के श्री राम जानकी मंदिर से महाकवि केशवदास द्वारा वर्ष 1591 ई. में रचित 'रसिक प्रिया' की हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है। यह रीतिकाल का महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें काव्यशास्त्र, श्रृंगार रस और नायिका भेद का विस्तार से वर्णन किया गया है। बुरहानपुर से लगभग 220 वर्ष पुराना 20 फीट लंबा हस्तलिखित श्रीमद्भागवत महापुराण भी मिला है, जिसका आधिकारिक पंजीकरण किया जा चुका है। दतिया में श्री राधा वल्लभ मिश्रा के आवास से ओरछा नरेश राजा उद्दोत सिंह के काल का विक्रम संवत 1828 अंकित ताम्रपत्र अभिलेख भी प्राप्त हुआ है।
क्या है ज्ञान भारतम् ऐप और इसका उद्देश्य?
ज्ञान भारतम् ऐप भारत सरकार की एक डिजिटल पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में उपलब्ध दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना तथा उनका संरक्षण सुनिश्चित करना है। इन पांडुलिपियों में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, संस्कृति, दर्शन, साहित्य और जीवन मूल्यों का अमूल्य भंडार सुरक्षित है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को इन महत्वपूर्ण ग्रंथों तक आसान पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है।
आम नागरिक भी बन सकते हैं इस अभियान का हिस्सा
ज्ञान भारतम् ऐप के जरिए कोई भी व्यक्ति शीर्षक, लेखक, भाषा, विषय या संग्रह स्थल के आधार पर पांडुलिपियों की जानकारी खोज सकता है। यदि किसी व्यक्ति, परिवार या संस्था के पास कोई दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि सुरक्षित है, तो वह ऐप के माध्यम से उसके संरक्षण और डिजिटलीकरण के लिए आवेदन कर सकता है। इसके अलावा नागरिक अपने पास मौजूद प्राचीन ग्रंथों की जानकारी साझा कर इस राष्ट्रीय अभियान में भागीदारी निभा सकते हैं। इससे भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को सुरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकेगा।


