MP में बाढ़ से हाहाकार: मध्य प्रदेश में मूसलधार बारिश से हालात बिगड़े, सेना ने बाढ़ राहत अभियान तेज़ किया। कई जिले जलमग्न, हेलीकॉप्टर से बचाव जारी। सवाल उठता है-क्या सरकार और सेना मिलकर हालात को संभाल पाएंगे?

MP Flood Rescue Operation: मध्यप्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश के चलते बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। खासकर विदिशा, रायसेन, सीहोर, जबलपुर और भोपाल जैसे क्षेत्रों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। ऐसे में भारतीय सेना ने राज्य सरकार के अनुरोध पर बाढ़ राहत कार्य तेज़ कर दिए हैं। सेना ने विशेष बचाव दलों के साथ बोट, मेडिकल सप्लाई, और राहत सामग्री भेजना शुरू कर दिया है। कई जगहों पर सड़कों का संपर्क कट गया है और लोग छतों या ऊंचे स्थानों पर फंसे हुए हैं।

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क्या प्रशासन चूक गया? आखिर क्यों बिगड़े हालात इस कदर? 

लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या राज्य प्रशासन इस स्थिति के लिए तैयार नहीं था? IMD द्वारा पहले ही भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी, बावजूद इसके कई क्षेत्रों में समय रहते निकासी या राहत की योजना नहीं बन सकी। अब जब हालात हाथ से निकलते जा रहे हैं, सेना को मोर्चा संभालना पड़ा है। कहीं-कहीं प्रशासन के पास बोट या राहत सामग्री की कमी दिखी, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

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सेना का मिशन ‘रेस्क्यू’: हेलिकॉप्टर, नावें और जवान-दिन-रात सेवा में जुटे 

भारतीय सेना के अफसरों ने बताया कि राहत कार्यों में इंजीनियर टास्क फोर्स, मेडिकल टीम, और बोट यूनिट्स को लगाया गया है। कई ग्रामीण इलाकों में हेलिकॉप्टर के ज़रिए भी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। सेना की टीमें न सिर्फ लोगों को सुरक्षित निकाल रही हैं, बल्कि ज़रूरी दवाइयां, पीने का पानी और खाद्य सामग्री भी वितरित कर रही हैं।

कब तक चलेगा संकट? मौसम विभाग की चेतावनी और आगे की रणनीति 

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटे और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में सरकार और सेना को मिलकर रणनीति बनानी होगी ताकि किसी भी बड़े नुकसान को टाला जा सके। राज्य सरकार ने सभी ज़िलों में कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए हैं और एनडीआरएफ की मदद भी ली जा रही है। स्कूलों को बंद कर दिया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।