मध्यप्रदेश के e-Pravesh पोर्टल ने नया रिकॉर्ड बनाया है। 24 जुलाई तक 4.89 लाख छात्रों ने कॉलेजों में प्रवेश लिया, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है।

भोपाल। मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इस वर्ष एक नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के प्रयासों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। उच्च शिक्षा विभाग की ई-प्रवेश (e-Pravesh) प्रणाली के जरिए इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में विद्यार्थियों ने कॉलेजों में दाखिला लिया है।

24 जुलाई 2026 तक प्रदेश के शासकीय और अशासकीय महाविद्यालयों में 4 लाख 89 हजार 169 विद्यार्थियों का प्रवेश हो चुका है। पिछले चार वर्षों की समान अवधि की तुलना में यह सबसे अधिक संख्या है, जो उच्च शिक्षा के प्रति बढ़ते रुझान और डिजिटल व्यवस्था पर विद्यार्थियों के भरोसे को दर्शाती है।

उच्च शिक्षा प्रवेश 2026: चार साल में सबसे बड़ा आंकड़ा

उच्च शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में प्रवेश प्रक्रिया में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • वर्ष 2023-24 : 3,21,154 प्रवेश
  • वर्ष 2024-25 : 3,25,095 प्रवेश
  • वर्ष 2025-26 : 4,15,655 प्रवेश
  • वर्ष 2026-27 : 4,89,169 प्रवेश

यदि पिछले वर्ष से तुलना करें तो इस बार 73,514 अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। वहीं वर्ष 2023-24 की तुलना में यह संख्या 1,68,015 अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल बदलाव, आसान प्रवेश प्रक्रिया और विद्यार्थी-अनुकूल नीतियों का सकारात्मक परिणाम है।

e-Pravesh Portal और मोबाइल ऐप बने सफलता की सबसे बड़ी वजह

इस रिकॉर्ड प्रवेश के पीछे सबसे अहम भूमिका उच्च शिक्षा विभाग की डिजिटल ई-प्रवेश प्रणाली की रही है। अब विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए कॉलेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। वे घर बैठे ही पंजीयन, दस्तावेज अपलोड, ऑनलाइन सत्यापन, कॉलेज और कोर्स का चयन, शुल्क भुगतान और एडमिशन प्रक्रिया पूरी कर पा रहे हैं। इससे न केवल समय की बचत हुई है बल्कि पूरी प्रक्रिया पहले के मुकाबले ज्यादा पारदर्शी और सुविधाजनक भी बनी है।

24×7 कॉल सेंटर और हेल्प सेंटर से छात्रों को मिली बड़ी राहत

प्रवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए विभाग ने प्रदेशभर में कई सहायता व्यवस्थाएं शुरू की हैं। महाविद्यालयों में हेल्प सेंटर स्थापित किए गए हैं। साथ ही विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए 24×7 कॉल सेंटर, जिला और संभाग स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग तथा तकनीकी सहायता की व्यवस्था भी की गई है। इन सुविधाओं के कारण विद्यार्थियों को आवेदन और प्रवेश से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान मिल रहा है।

CLC Round में उसी दिन मिल रहा एडमिशन

उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज लेवल काउंसिलिंग (CLC) चरण को पूरी तरह विद्यार्थी-केंद्रित बनाया है। इस व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को उसी दिन पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश की सुविधा मिल रही है। इसका परिणाम यह हुआ कि अंतिम चरण में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपनी पसंद के कॉलेजों में दाखिला लेने में सफल रहे।

7.18 लाख छात्रों ने कराया पंजीयन, लाखों को मिला प्रवेश

वर्तमान शैक्षणिक सत्र में अब तक:

  • 7,18,386 विद्यार्थियों ने e-Pravesh पोर्टल पर पंजीयन कराया।
  • 6,31,854 विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा हुआ।
  • 4,89,169 विद्यार्थियों को प्रवेश मिला।

प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों में:

  • 3,38,148 छात्र अंडर ग्रेजुएशन (UG) पाठ्यक्रमों में
  • 1,04,455 छात्र पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) पाठ्यक्रमों में
  • 46,566 छात्र NCTE पाठ्यक्रमों में शामिल हैं।

प्रवेश मेला अभियान से अंतिम चरण में बढ़ी एडमिशन की रफ्तार

अतिरिक्त कॉलेज लेवल काउंसिलिंग (CLC) राउंड के दौरान विभाग ने प्रदेशभर में "प्रवेश मेला" अभियान चलाया। इस अभियान का उद्देश्य रिक्त सीटों पर अधिक से अधिक विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाना था। प्रवेश मेले में छात्रों को एक ही स्थान पर पंजीयन, चॉइस फिलिंग, दस्तावेज सत्यापन, सीट आवंटन संबंधी जानकारी और फीस जमा करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। कॉलेजों में बनाए गए हेल्प डेस्क के माध्यम से छात्रों की समस्याओं का तुरंत समाधान भी किया गया।

शुल्क जमा नहीं करने वाले छात्रों से भी किया गया संपर्क

विभाग ने ऐसे विद्यार्थियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया, जिन्होंने पंजीयन और दस्तावेज सत्यापन तो करा लिया था, लेकिन शुल्क जमा नहीं किया था। इसके अलावा जिन पाठ्यक्रमों में सीटें खाली थीं, वहां विशेष परामर्श अभियान चलाकर विद्यार्थियों को विषय चयन और चॉइस संशोधन में सहायता प्रदान की गई।

31 जुलाई तक मौका, कोई छात्र न रहे उच्च शिक्षा से वंचित

उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि CLC चरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। सभी शासकीय और अशासकीय महाविद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि अंतिम तिथि तक हेल्प सेंटर पूरी सक्रियता से संचालित किए जाएं और प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक पहुंच बनाई जाए। विभाग का लक्ष्य है कि कोई भी छात्र जानकारी की कमी, तकनीकी परेशानी या प्रक्रिया संबंधी दिक्कतों के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न रह जाए।