मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हर विधानसभा में कृषि यंत्र किराए की दुकान खोलने की तैयारी में हैं। इससे छोटे किसानों को आधुनिक मशीनें सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगी।
भोपाल। मध्यप्रदेश में किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ने और कृषि लागत कम करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत राज्य सरकार हर विधानसभा क्षेत्र में 'कृषि यंत्र किराए की दुकान' शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस पहल का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को कम लागत पर आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे आसानी से खेती के सभी कार्य कर सकें। फिलहाल प्रदेश में 5,260 कृषि यंत्र किराया केंद्र संचालित हो रहे हैं। सरकार अब हर वर्ष 1,060 नए कृषि यंत्र किराया केंद्र स्थापित करेगी, जिससे प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र तक यह सुविधा पहुंचाई जा सके।
CM Mohan Yadav Plan: छोटे किसानों को मिलेगा आधुनिक कृषि यंत्रों का आसान विकल्प
राज्य सरकार की इस योजना से उन किसानों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा, जो महंगे कृषि यंत्र खरीदने में सक्षम नहीं हैं। किराए पर उपलब्ध आधुनिक मशीनों की मदद से खेत की जुताई, बुवाई और अन्य कृषि कार्य कम समय और कम लागत में पूरे किए जा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में भी सुधार होगा।
Vidisha Agriculture Hub: कृषि यंत्र निर्माण में आत्मनिर्भर बन रहा मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश अब कृषि यंत्र निर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। विदिशा जिला इस दिशा में एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। यहां उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उपकरण तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें ग्रेडर, लेवलर, हाइड्रॉलिक ट्रॉली, कल्टीवेटर और प्लाऊ जैसे आधुनिक कृषि यंत्र शामिल हैं। जिले में इस समय करीब 150 कृषि उपकरण निर्माण इकाइयां संचालित हैं। यहां तैयार होने वाले उपकरणों की मांग सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों और विदेशों तक पहुंच चुकी है।
Export Success: विदिशा में बने कृषि यंत्र 10 से अधिक देशों तक पहुंचे
विदिशा में निर्मित कृषि उपकरणों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। यहां बने कृषि यंत्र मेडागास्कर, नाइजीरिया, सूडान, युगांडा, घाना, अल्जीरिया, ग्वाटेमाला, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश सहित कई देशों में भेजे जा रहे हैं। इससे प्रदेश की कृषि मशीनरी उद्योग को नई पहचान मिल रही है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
Success Story: 1993 से शुरू हुआ कारोबार, अब विदेशों तक पहुंचा विदिशा का ब्रांड
उषा एग्रो के संचालक मानस गुप्ता बताते हैं कि उनकी कंपनी लोडर, डिलोडर, कल्टीवेटर सहित खेती में उपयोग होने वाले कई कृषि उपकरण तैयार करती है। उन्होंने बताया कि इस व्यवसाय की शुरुआत उनके पिता ने वर्ष 1993 में छोटे स्तर पर की थी। समय के साथ कारोबार का विस्तार हुआ और आज उनके उत्पाद देश के कई राज्यों के साथ-साथ 10 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं।
मानस गुप्ता के अनुसार, उनके कुल कारोबार का लगभग दो-तिहाई हिस्सा भारत में और एक-तिहाई विदेशों में होता है। कंपनी का सालाना कारोबार करीब 4 करोड़ रुपये का है। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने और विदेशी बाजार तक पहुंचने में राज्य सरकार की नीतियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सरकार की सहायता से उन्हें जी-20 सम्मेलन में भाग लेने का अवसर भी मिला, जिसमें यात्रा और अन्य खर्च का लगभग 75 प्रतिशत सरकार ने वहन किया।
Farmer Equipment Business: कोरोना काल में शुरू हुआ व्यवसाय, अब सालाना 50 लाख का कारोबार
संजय उद्योग के संचालक विष्णु शर्मा ट्रैक्टर से जुड़े कृषि उपकरण जैसे कल्टीवेटर और प्लाऊ तैयार करते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान इस व्यवसाय की शुरुआत की थी। शुरुआत से ही किसानों ने उनके उत्पादों को अच्छी प्रतिक्रिया दी, जिससे कारोबार लगातार बढ़ता गया। वर्तमान में उनके कृषि उपकरण विदिशा के अलावा आसपास के जिलों और अन्य राज्यों तक भी पहुंच रहे हैं। उनका वार्षिक कारोबार करीब 50 लाख रुपये का है। उन्होंने सरकार से कृषि उपकरण उद्योग से जुड़े उद्यमियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की मांग भी की।
Agro Industry Growth: कृषि उपकरण उद्योग से करोड़ों का कारोबार
मेसर्स किसान इंडस्ट्रीज के संचालक विपिन रघुवंशी कल्टीवेटर, प्लाऊ, लोडर और डिलोडर जैसे कृषि यंत्र तैयार करते हैं। उनके उत्पाद मुख्य रूप से विदिशा और आसपास के जिलों में किसानों तक पहुंचते हैं। खेती के हर चरण—खेत तैयार करने, बुवाई, रोपाई और कटाई के लिए आवश्यक उपकरण उनकी इकाई में बनाए जाते हैं।
वहीं एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी के संचालक दीपक नरवरिया ने बताया कि उनका कारोबार मध्यप्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों तक फैल चुका है। उनकी कंपनी का वार्षिक कारोबार करीब 3 करोड़ रुपये का है और उनके प्रमुख ग्राहक किसान तथा कृषि क्षेत्र से जुड़ी संस्थाएं हैं।


