CM मोहन यादव ने पत्रकारों से फेक न्यूज से बचने, सत्य और साहस के साथ खबरें दिखाने तथा सत्ता विरोध के बीच देशहित को प्राथमिकता देने की अपील की।

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्रकारिता की जिम्मेदारी और लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर जोर देते हुए पत्रकारों से फेक न्यूज से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पत्रकार सनसनी पैदा करें, लेकिन उसके साथ सत्य और साहस भी होना चाहिए। सत्ता का विरोध करना गलत नहीं है, लेकिन पत्रकारिता करते समय देशहित को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बात 18 अगस्त को भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय समारोह ‘अभ्युदय 2026’ के शुभारंभ के दौरान कही।

उन्होंने कहा, 'आज का पत्रकार फेक न्यूज की जगह नेक न्यूज की आदत डाले।' मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे सनसनी के साथ सच को सामने लाने का प्रयास करें और इसके लिए जरूरी साहस भी दिखाएं। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोक सत्ता या सत्ता के विरोध में हो सकते हैं, इसमें कोई समस्या नहीं है, लेकिन देशहित का ध्यान रखना जरूरी है।

CM Mohan Yadav ने दीप प्रज्वलित कर ‘अभ्युदय 2026’ का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने मां सरस्वती, भारत माता और दादा माखनलाल चतुर्वेदी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से प्रकाशित तीन महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इनमें ‘दो सदी साक्षी’, ‘मैं न्यूज़ रूम’ और भारत की टेंपल इकोनॉमी पर केंद्रित जर्नल ‘इंडियन कलाईडोस्कोप’ शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में लगाई गई ‘100 साल से 100 सुर्खियां’ प्रदर्शनी भी देखी। कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखक और कलाकार पीयूष मिश्रा भी मौजूद रहे। पीयूष मिश्रा ने भोपाल से जुड़ी अपनी पुरानी यादें साझा करते हुए शहर की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भोपाल उन्हें बेहद अद्भुत और सुरक्षित शहर लगता है। उन्होंने भारत भवन से जुड़ी अपनी पुरानी यादों का भी उल्लेख किया।

प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को CM मोहन यादव ने किया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्राओं परिधि पुजारी, तमन्ना लश्कर और शिविका गुप्ता को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें अलंकरण प्रदान किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना और उसके सफर का जिक्र करते हुए कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय को स्थापित हुए 36 साल हो चुके हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यहां आज तक किसी विद्यार्थी का आपस में ‘36 का आंकड़ा’ नहीं रहा, बल्कि सभी के बीच प्रेम और जुड़ाव का रिश्ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय की साख और धाक दोनों अच्छी हैं। आज पत्रकारिता का दायरा काफी व्यापक हो चुका है। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए खबरें लोगों तक पहुंच रही हैं।

CM Mohan Yadav ने रामायण और नारद से जोड़ा पत्रकारिता का इतिहास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पत्रकारिता को आधुनिक दौर तक सीमित नहीं माना। उन्होंने इसके इतिहास को धार्मिक और पौराणिक संदर्भों से जोड़ते हुए भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के काल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में भगवान राम के दोनों पुत्रों का पालन-पोषण हुआ। उस समय आज जैसी मीडिया व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में बच्चों को उनके पिता राम से परिचित कराने और उनकी कहानी लोगों तक पहुंचाने की चुनौती थी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि ने बच्चों को रामायण सुनाई और उसे संगीत के साथ कंठस्थ कराया। बाद में दोनों बच्चों को अयोध्या भेजा गया, जहां उन्होंने लोगों के माध्यम से अपनी बात वहां तक पहुंचाई। मुख्यमंत्री ने इसे भी उस दौर में सूचना और विचारों को लोगों तक पहुंचाने का एक माध्यम बताया।

इसी तरह उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के समय की भविष्यवाणियों को भी संचार के एक माध्यम के तौर पर देखा। उन्होंने पत्रकारिता के संदर्भ में नारद देव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी घटनाओं और सूचनाओं को लोगों तक पहुंचाने का काम होता रहा होगा।

Veer Savarkar और पत्रकारिता की भूमिका का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पत्रकारिता की भूमिका का जिक्र करते हुए वीर सावरकर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सावरकर ने आजादी से पहले ही पत्रकार की भूमिका और उसके साहस को सामने रखा था। उन्होंने कहा कि लंदन में पढ़ाई के दौरान सावरकर ने 1857 के संघर्ष को सही संदर्भ में दुनिया के सामने रखने का प्रयास किया। उनका उद्देश्य यह बताना था कि 1857 की लड़ाई केवल विद्रोह नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतने प्रभावशाली क्षेत्र में जाकर इस तरह की बात सामने रखना एक पत्रकार जैसी हिम्मत का उदाहरण है। उन्होंने सावरकर को मिली दो बार की कालापानी की सजा का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके भीतर अद्भुत आंतरिक शक्ति थी। डॉ. यादव ने यह भी कहा कि सावरकर ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रयास किए थे।

Emergency में अखबारों ने खाली पन्नों से किया विरोध

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आपातकाल के दौरान भारतीय पत्रकारिता की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में कई समाचार पत्रों ने अपने पहले पन्ने को खाली रखकर विरोध का संदेश दिया और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष की अलख जगाई। उन्होंने कहा कि आपातकाल के खिलाफ हुए इस संघर्ष ने लोकतंत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, यही संघर्ष भारत को दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में मजबूती से खड़ा करता है। मुख्यमंत्री ने लेखक-कलाकार पीयूष मिश्रा के चर्चित गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह लोगों में जोश और गौरव की भावना पैदा करता है।

कवि प्रदीप और पत्रकार-साहित्यकारों के संघर्ष को किया याद

मुख्यमंत्री ने आजादी से पहले की पत्रकारिता और साहित्यिक संघर्षों का जिक्र करते हुए उज्जैन के कवि प्रदीप को भी याद किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के लिए यह गौरव की बात है कि कवि प्रदीप ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में अपनी रचनाओं के जरिए लोगों में चेतना पैदा की। डॉ. यादव ने कहा कि उस समय पत्रकार और साहित्यकार दबाव के बावजूद पीछे नहीं हटे। उन्होंने लोकतंत्र के लिए इसी तरह के साहस और जिम्मेदारी को जरूरी बताया।

Makhanlal University के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध: CM मोहन यादव

कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से बातचीत में ‘अभ्युदय 2026’ कार्यक्रम में शामिल पत्रकारों, साहित्यकारों और कलाकारों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय केवल देश का ही नहीं, बल्कि दुनिया का प्रतिष्ठित संस्थान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास के लिए मध्यप्रदेश सरकार पूरी तरह संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता, साहित्य और कला लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और ऐसे संस्थानों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार लगातार काम करती रहेगी।