मध्यप्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत स्थानीय उत्पादों को बाजार, ब्रांडिंग और निर्यात से जोड़ा जा रहा है। इस मॉडल से कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल रहे हैं।
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना को एक प्रभावी आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। यह योजना अब केवल स्थानीय उत्पादों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें बाजार, निर्यात और रोजगार से जोड़ रही है। इस मॉडल को 31 मार्च को वाराणसी में आयोजित सहयोग सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा, जहां उत्तर प्रदेश के नवाचारों को भी समझा जाएगा।
ODOP से स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों का आर्थिक सशक्तिकरण
ODOP योजना के तहत हर जिले के विशेष उत्पाद की पहचान कर उसे उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ा गया है। मध्यप्रदेश में इसे एक संपूर्ण वैल्यू चेन मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, जिससे कारीगरों, किसानों और छोटे उद्यमियों को स्थायी आय और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
हर जिले की खासियत को मिला बाजार और पहचान
प्रदेश के अलग-अलग जिलों के खास उत्पादों को ODOP के तहत संगठित कर बाजार से जोड़ा गया है। जैसे- श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, सीहोर का बासमती, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, मंडला-डिंडोरी का कोदो-कुटकी, सतना का टमाटर और शहडोल की हल्दी। यह दर्शाता है कि प्रदेश के हर क्षेत्र की आर्थिक क्षमता को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर MP के ODOP मॉडल को मिला सिल्वर अवॉर्ड
मध्यप्रदेश के ODOP मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वर्ष 2024 में इस योजना को सिल्वर अवॉर्ड मिला, जो राज्य के कारीगरों, किसानों और उद्यमियों की मेहनत और सरकार के मजबूत इकोसिस्टम का परिणाम है।
निर्यात, कौशल विकास और बाजार से जुड़ा एकीकृत सिस्टम
प्रदेश में ODOP को निर्यात बढ़ाने, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ा गया है। वर्कशॉप, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। ब्रांडिंग, पैकेजिंग, GI टैगिंग और ई-कॉमर्स से इन उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाई जा रही है, जिससे ये वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं।
MP-UP सम्मेलन में नए अवसर और सहयोग की संभावनाएं
मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सहयोग सम्मेलन में दोनों राज्यों के मंत्री, अधिकारी और नीति निर्माता शामिल होंगे। इसमें ODOP के बेहतर क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी। मध्यप्रदेश अपने अनुभव साझा करेगा कि इस योजना को रोजगार और निर्यात आधारित मॉडल के रूप में कैसे सफल बनाया जा सकता है।
‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन को मिलेगा बढ़ावा
इस सम्मेलन से ODOP उत्पादों के लिए नए बाजार खुलेंगे, निर्यात को गति मिलेगी और कारीगरों व उद्यमियों को बड़े प्लेटफॉर्म मिलेंगे। दोनों राज्यों के बीच सहयोग और बेहतर प्रथाओं के आदान-प्रदान से यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।
50 से अधिक जिलों में लागू ODOP, मिल रहा व्यापक लाभ
मध्यप्रदेश में 50 से अधिक जिलों के विशेष उत्पादों को ODOP के तहत जोड़ा गया है। इनमें बड़वानी का केला, खरगोन की मिर्च, इंदौर का आलू, सागर के कृषि उपकरण, मंदसौर का लहसुन, नीमच का धनिया, आगर मालवा-राजगढ़-छिंदवाड़ा का संतरा, टीकमगढ़-निवाड़ी का अदरक, देवास-हरदा का बांस, नरसिंहपुर की तुअर दाल, सिवनी का सीताफल, सीधी का कालीन, सतना का टमाटर और शहडोल की हल्दी जैसे कई उत्पाद शामिल हैं।
उत्पादन से लेकर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार तक एकीकृत समर्थन के कारण यह योजना किसानों, कारीगरों और उद्यमियों को स्थायी आय और निर्यात के अवसर दे रही है, जिससे प्रदेश में संतुलित और समावेशी विकास को गति मिल रही है।


